
जोधपुर। प्रदेश में कोयला संकट तो सभी के सामने है और उससे बिजली कटौती की नौबत भी आ चुकी है। लेकिन इस बिजली संकट की कोढ़ में खाज का काम अभी वर्तमान वातावरण भी कर रहा है। वातावरण में हवा न के बराबर है, एेसे में विंड एनर्जी का उत्पादन औसत उत्पादन का १० प्रतिशत भी नहीं हो रहा है। एेसे में यह कमी भी गांवों में सप्लाई को प्रभावित कर रही है।
फैक्ट फाइल
- १० जिले आते हैं जोधपुर डिस्कॉम में
- ४ हजार मेगावाट हैं अभी जोधपुर डिस्कॉम की कुल डिमांड
- ७०० मेगावाट कम मिल रही वर्तमान में बिजली
- ७००-८०० मेगावाट विंड से एनर्जी मिलती है जब हवा चलती है
- २०-४० मेगावाट मिल रही है अभी विंड एनर्जी
वातावरण प्रतिकूल
मानूसन के ठीक बाद का समय हमेशा ही विंड एनर्जी के लिए प्रतिकूल होता है। लेकिन इस बार पिछले साल के मुकाबले औसत हवा की गति भी काफी कम है। मानसून सीजन में तेज हवाओं के कारण यही बिजली सर्वाधिक बनती है। इसके बाद फरवरी-मार्च माह भी विंड एनजी के लिए अनुकूल होता है।
५ प्रतिशत भी बिजली नहीं बन रही
विंड एनर्जी से औसत ७०० से ८०० मेगावाट बिजली बनती है। लेकिन इन दिनों २०-४० मेगावाट यानि ५ प्रतिशत से भी कम बिजली बन रही है। अगर विंड एनर्जी अपनी पूरी क्षमता से मिलने लग जाए तो जो बिजली कोयले की कमी के कारण डिस्कॉम को कम मिल रही है, उसकी पूर्ति विंड एनर्जी कर सकती है।
सोलर की क्षमता फिक्स
पश्चिमी राजस्थान में सोलर एनर्जी का विस्तार लगा है। लेकिन यह हमारे क्षेत्र के लिए काम नहीं आ रही। डिस्कॉम ने वर्तमान में २६ सौ मेगावाट के ही पावर परचेज एग्रीमेंट सोलर के लिए किए गए हैं। एेसे में भले ही पश्चिमी राजस्थान में सोलर बिजली ज्यादा बने, लेकिन डिस्कॉम को इसकी क्षमता के अनुरूप ही मिलेगी।
इनका कहना...
विंड एनर्जी का भी वर्तमान में सपोर्ट नहीं मिल रहा है। २० मेगावाट ही बिजली मिल रही है। कोयले की कमी पूरी करने के प्रयास किए जा रहे हैं। फिलहाल गांवों में कटौती है, जिला मुख्यालयों की स्थिति पर लगातार नजर बनाई गई है।
- अविनाश सिंघवी, एमडी, जोधपुर डिस्कॉम।