
जोधपुर।
जोधपुर की एक बेटी ने मंजिल पाने के लिए हजारों दिक्कतें सही, इसके बाद भी बुलंद हौंसलों से मुकाल हासिल किया और प्रेरणा बनी। एक रिक्शा चालक की बेटी, जो विपरीत आर्थिक परिस्थितियों के बीच डिगी नहीं और मेहनत के दम पर लेखा क्षेत्र की महत्वपूर्ण चार्टर्ड एकाउंटेंट (सीए) परीक्षा अच्छे अंकों के साथ पहले प्रयास में पास की। आज पूरे देश मे जहां मात्र 6 प्रतिशत परिणाम रहा है, वहां एक टेक्सी चलाने वाले की बेटी ने प्रथम प्रयास में सीए बनकर दिखाया।
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रजिस्ट्रेशन फीस जमा कराना भी मुश्किल
बचपन से ही पढ़ाई में आगे रहने वाली दिव्या 12वीं में जोधपुर जिले में प्रथम रहने के साथ ही सीपीटी की परीक्षा पास कर ली, और यहीं से शुरू हुआ संघर्ष। काबिलियत से सम्मान और पुरस्कार तो जीत लिए पर आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण सीए के लिए रजिस्ट्रेशन फ ीस जमा कराना भी मुमकिन नही था। तब कोचिंग सर ने सीपीटी फ ीस माफ कर एक अवसर दिया।
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प्रतिभा देख सहयोग के लिए आगे आए लोग
कोरोनाकाल में 4 महिने तक कोई आमदनी नहीं, इनके पिता को गंभीर टाइफ ाइड हो गया, एक बार तो उनके बचने की उम्मीद ही न रही। अपने घर में पढने की जगह न होने और तनावपूर्ण वातावरण होने के कारण परिचित ने बिना किराया लिए अपने घर पर रोज 8-10 घंटे की पढ़ाई करने की व्यवस्था की थी। दिव्या की प्रतिभा को देख कई लोगों ने सहयोग किया।
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विद्यार्थियों का मागदर्शन करेगी
दिव्या की सफलता में भारती संग्रहिता संस्थान का सहयोग विशेष रहा, संस्थान की अध्यक्षा भानुप्रिया भट्ट ने उसकी पढ़ाई के लिए स्कॉलरशिप की व्यवस्था की। संस्थान के सहयोग और स्वयं की मेहनत के कारण आखिर दिव्या ने अपनी मंझिल पा ही ली। दिव्या ने बताया कि वह संस्थान में अपनी सेवाएं देकर विद्यार्थियों को सीए बनने के लिए मार्गदर्शन करेगी।