जोधपुर

जोधपुर में एक आदेश को लेकर दो विश्वविद्यालय आमने-सामने

- जेएनवीयू ने कहा-3 दिन में कर्मचारी स्वयं को रीलिव मानकर उपस्थिति देवें - एमबीएम विवि ने ऑर्डर निकाला, अगर कोई कर्मी बगैर रीलिव हुए गया तो लैब की रिकवरी निकाल देंगे
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जोधपुर में एक आदेश को लेकर दो विश्वविद्यालय आमने-सामने
जोधपुर में एक आदेश को लेकर दो विश्वविद्यालय आमने-सामने

जोधपुर. जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय ने कुछ समय पहले एमबीएम विश्वविद्यालय स्थानांतरित किए गए 90 अशैक्षणिक कर्मचारियों के आदेश को स्वयं ही निरस्त करके सोमवार को 66 कर्मचारियों का नया स्थानांतरण आदेश निकाल दिया। शेष कर्मचारियों को स्वयं ही रीलिव मानकर तीन दिन के भीतर स्थापना शाखा में उपस्थित देने को कहा अन्यथा उनकी अनुपस्थित मानी जाएगी। यह एक तरफा आदेश प्राप्त होते ही मंगलवार सुबह एमबीएम विश्वविद्यालय ने भी एक आदेश जारी करके किसी भी कर्मचारी के रीलिव होने पर रोक लगा दी। एमबीएम विवि ने पूर्व में जॉइन कर चुके कर्मचारियों को चेतावनी देते हुए लिखा कि अगर कोई कर्मचारी बगैर रीलिव हुए जेएनवीयू चला जाता तो प्रयोगशाला वगैरह की सारी जिम्मेदारी उसकी होगी। उसकी रीकवरी निकाल दी जाएगी। इधर कर्मचारी दोनों विश्वविद्यालयों के मध्य फंस गए हैं।

यह है मामला

जेएनवीयू से अलग होकर नया विवि बने एमबीएम इंजीनियरिंग कॉलेज में सरकार ने 226 अशैक्षणिक कर्मचारियों के पद जेएनवीयू से ट्रांसफर कर दिए। इसकी अनुपालना में दोनों विश्वविद्यालय के तीन-तीन अधिकारियों की संयुक्त कमेटी बनी। कमेटी की अनुशंषा के अनुसार 30 मार्च को 60 कर्मचारी और 6 मई को 30 कर्मचारी जेएनवीयू से एमबीएम विवि ट्रांसफर किए गए। इनमें से 40 कर्मचारियों ने एमबीएम में उपस्थिति दी। सोमवार 23 मई को जेएनवीयू ने 30 मार्च व 6 मई के आदेश को निरस्त कर 66 नए कर्मचारियों की ट्रांसफर सूची जारी कर दी। साथ ही टेक्निशिन ग्रेड के 35 से अधिक कर्मचारियों के स्थानांतरण पर एमबीएम को निर्देशित भी किया कि वह स्वयं राज्य सरकार से अतिरिक्त भेजे गए कर्मचारियों के नए पद स्वीकृत करा लेवें। एमबीएम ने 24 मई को आदेश जारी करके जेएनवीयू के आदेश को निरस्त कर दिया। एमबीएम विवि ने अपने आदेश में लिखा कि दोनों की संयुक्त कमेटी ही कोई निर्णय ले सकती है। एमबीएम विवि का स्वतंत्र अस्तित्व है, उसे कोई आदेश नहीं दे सकता।

एमबीएम के कर्मचारी का जेएनवीयू कैसे कर सकता है ट्रांसफर

एमबीएम विवि का कहना है जिन 40 कर्मचारियों ने पहले उपस्थिति दी थी, उसमें से अधिकांश का जेएनवीयू ने ट्रंासफर कर लिया, जबकि वे अब एमबीएम विवि के कर्मचारी हो चुके हैं और करोड़ों रुपयों की इंजीनियरिंग प्रयोगशालाओं का उनके पास चार्ज है।

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एमबीएम अलग विवि है, जेएनवीयू ऐसे एक तरफा आदेश जारी नहीं कर सकता। इन कर्मचारियों के पास करोड़ों रुपए के उपकरणों की लैब का चार्ज है, ये मनमर्जी से रीलिव कैसे होंगे? वास्तव में तो अब हमारे पास केवल 10-15 कर्मचारी ही बचे हैं, जबकि सरकार ने 226 पद दिए हैं।

प्रो अजय शर्मा, कुलपति, एमबीएम विश्वविद्यालय जोधपुर

Published on:
25 May 2022 08:30 pm