जोधपुर

जोधपुर की यह रोड पर है प्रसूताओं के लिए जानलेवा, चलना जरा संभलकर

सड़क पार करने वाले अन्य राहगीरों व विद्यार्थियों की जान को भी खतरा रहता है।

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अरुण सारस्वत/जोधपुर.

यदि आप प्रसूता अथवा जच्चा-बच्चा को उम्मेद अस्पताल लेकर आ रहे हैं, तो जरा बचके जाएं। यहां तेज रफ्तार दुनिया में जन्म लेने वाले शिशु और उसकी मां को मौत का शिकार बना सकती है। संभाग के सबसे बड़े जनाना अस्पताल उम्मेद के सामने तेज वाहनों को रोकने के लिए स्पीडब्रेकर या रोड डिवाइडर नहीं है। यह अस्पताल चौराहे पर कॉर्नर में है। जहां से वाहन जैसे ही सड़क पर निकलते हैं, उन्हें तेज रफ्तार से आ रहे वाहनों से मौत का आमना-सामना करना पड़ता है। इस रास्ते में कई निजी शिक्षण संस्थान संचालित होते हैं। एेसे में जच्चा-बच्चा के साथ ही सड़क पार करने वाले अन्य राहगीरों व विद्यार्थियों की जान को भी खतरा रहता है। इस रास्ते पर आए दिन दुर्घटनाएं हो रही हैं, लेकिन सुध लेने वाला भी कोई नहीं है। उल्लेखनीय है कि यह मामला पूर्व में शहर विधायक कैलाश भंसाली भी विधानसभा में उठा चुके हैं। इसके बावजूद सुनवाई नहीं हुई है।


सिवांची गेट : शहर की महत्वपूर्ण सड़कों में शुमार

इस मार्ग पर उम्मेद अस्पताल और शिक्षण संस्थान संचालित होते हैं। यह मार्ग सिवांची गेट श्मशान व कब्रिस्तान भी जाता है। इसी रास्ते में गीता भवन और मस्जिद जैसे धार्मिक स्थल हैं। भीतरी शहर और मेहरानगढ़ जाने के लिए भी लोग यहां से गुजरते हैं। महत्वपूर्ण रोड होने के बावजूद नगर निगम व जेडीए के अधिकारी सड़क पर ध्यान नहीं दे रहे हैं।

3.50 करोड़ की योजना हो रखी है स्वीकृत

पिछली सरकार के समय क्षेत्रवासियों और व्यापारियों ने डिवाइडर तथा स्पीडब्रेकर बनवाने की मांग को लेकर संघर्ष किया था। पांचवीं रोड से लेकर शनिश्चरजी थान तक डिवाइडर, अण्डरलाइन केबल व रोडलाइट पोल लगाने के लिए 3.50 करोड़ की योजना स्वीकृत हुई थी। इसका कार्य भी शुरू हो गया, लेकिन सोहनलाल मणिहार स्कूल तक ही डिवाइडर बनाया गया। बाद में यहां रोड लाइट, पोल व जालियां लगाने का काम नहीं हुआ। इन दिनों कई लोग डिवाइडर फांद कर जाते हैं, कई बार हादसे के शिकार हो जाते है।

अंधरे में डूबा रहता है क्षेत्र


पांचवीं रोड से सिंवाची गेट रोड तक लाइट नहीं होने से रात्रि में अंधेरा रहता है। उम्मेद अस्पताल में 24 घण्टे मरीजों की आवाजाही रहती है। साथ ही कई चिकित्सकों के निवास भी इसी रोड पर है। इन हालात में महिलाओं के पर्स छीनने और चैन स्नेचिंग का खतरा रहता है।

यह है लोगों का कहना

उम्मेद अस्पताल के बाहर रोड पर डिवाइडर व स्प्रीड ब्रेकर नहीं होने से दुर्घटनाएं होती हैं। रोड लाइट नहीं होने से शाम होते ही अंधेरा हो जाता है। चिकित्सकों के क्वार्टर से लेकर गीता भवन को गुजरने वाली नहर के पास फुटपाथ बनाने के लिए निगम से कई बार मांग की जा चुकी है।

देवेशसिंह कच्छवाह, व्यापारी

कई बार गर्भवती महिला और बच्चे भी दुर्घटना के शिकार हो चुके हैं। डिवाइडर नहीं होने से यातायात इंतजाम पूरी तरह से फेल है। ऊपर से आस-पास हाथठेले खड़े होने से वाहन चालकों को परेशानियों से जूझना पड़ता है।


तनवीर अहमद, व्यापारी


रोड लाइट नहीं होने के कारण रात में मरीजों को कई परेशानियों से जूझना पड़ता है। उम्मेद अस्पताल में गांव व संभागीय जिलों के मरीज इलाज के लिए आते हैं। कुछ दिनों पहले मैं भी अंधेरे के कारण हादसे का शिकार होते-होते बचा हूं।

इशाक खां, मरीज के परिजन, बाड़मेर


डिवाइडर के पास कब्रिस्तान जाने वाली सड़क से आने वाले वाहनों से ज्यादा सड़क हादसे होते हैं, क्योकि वहां से आने वाले वाहनों को गीता भवन की ओर से आने वाले वाहन नहीं दिखते।

नौशाद खान, टैक्सी चालक

Published on:
01 Dec 2017 03:08 pm
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