जोधपुर

राजस्थान का इकलौता शहर जहां भूजल घटने के बजाए बढ़ता जा रहा है, करोड़ों खर्च कर नदी में बहा रहे पानी

जोधपुर प्रदेश का इकलौता ऐसा शहर है जहां भूजल की समस्या ‘राइजिंग लेवल’ के रूप में है। इस समस्या पर कई शोध हुए और निजात पाने के लिए एक प्रोजेक्ट भी बना। करोड़ों रुपए खर्च कर इस प्रोजेक्ट की मुख्य पाइप लाइन का काम पूरा किया जा चुका है।
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underground water table is rising in jodhpur and drained into jojari
राजस्थान का इकलौता शहर जहां भूजल घटने के बजाए बढ़ता जा रहा है, करोड़ों खर्च कर नदी में बहा रहे पानी

अविनाश केवलिया/जोधपुर. जोधपुर प्रदेश का इकलौता ऐसा शहर है जहां भूजल की समस्या ‘राइजिंग लेवल’ के रूप में है। इस समस्या पर कई शोध हुए और निजात पाने के लिए एक प्रोजेक्ट भी बना। करोड़ों रुपए खर्च कर इस प्रोजेक्ट की मुख्य पाइप लाइन का काम पूरा किया जा चुका है। लेकिन औद्योगिक क्षेत्र अस्तित्व में नहीं आने के कारण पानी को नदी में बहाया जा रहा है।

जोधपुर के भूजल को बाहर निकालने के लिए बावडिय़ों सहित 109 पॉइंट पर मोटर लगाकर पानी खींचा जाता है। इसमें से आधा पानी शहर में अन्य उपयोग के लिए वितरित किया जाता है। यह पीने योग्य नहीं है। 69 ट्यूबवेल पॉइंट को पाइप लाइन से जोडकऱ पानी को शहर से दूर कुड़ी हौद तक लाने का प्रोजेक्ट अब पूरा होने को है। मुख्य पाइप लाइन से प्रतिदिन 5 एमएलडी पानी पर्यावरण संतुलन के लिए जोजरी नदी में डाला जा रहा है।

यह है समस्या
शहर के कई हिस्सों में भूजल इतना बढ़ गया है कि लोगों के घरों के तहखानों में जमा हो जाता है। इस समस्या से निपटने के लिए 109 पॉइंट पर पंप से प्रतिदिन 33 एमएलडी पानी निकाला जा रहा है। इसमें से 18 एमएलडी पानी शहरी क्षेत्र में अन्य उपयोग के लिए दिया जाता है। शेष 15 एमएलडी मानव शरीर के लिए हानिकारक है। इसमें से पांच एमएलडी कुड़ी हौद पहुंच रहा है। शेष दस एमएलडी पानी फिलहाल नालों में बह रहा है।

समाधान यह दर्शाया
प्रोजेक्ट पूरा होने पर पूरा 15 एमएलडी पानी कुड़ी हौद तक पहुंचाया जाना है। इस पानी को रीको कांकाणी औद्योगिक क्षेत्र के लिए उपयोग लेना है। कुड़ी हौद से आगे औद्योगिक क्षेत्र तक पानी ले जाने के लिए 10 लाख रुपए जमा करवा दिए गए हैं।

अभी हो यह रहा
पीएचइडी ने मुख्य पाइप लाइन का काम पूरा कर 15 में से 5 एमएलडी पानी कुड़ी हौद तक प्रतिदिन पहुंचाना शुरू कर दिया है। इसमें से एक एमएलडी पानी हाईकोर्ट परिसर में उद्यानिकी के लिए लिया जा रहा है। औद्योगिक क्षेत्र अस्तित्व में नहीं होने के कारण चार एमएलडी पानी नदी में बहाना पड़ रहा है।

फैक्ट फाइल
- 69 ट्यूबवेल के 15 एमएलडी भूजल को पाइप लाइन के जरिये कुड़ी हौद तक पहुंचाने का प्रोजेक्ट।
- 20 ट्यूवबवेल का 5 एमएलडी भूजल कुड़ी हौद तक पहुंचाना है।
- 32.9 करोड़ इस प्रोजेक्ट की कुल लागत है।
- 29 करोड़ इस प्रोजेक्ट पर अब तक खर्च हुए हैं।
- 18 किलोमीटर मुख्य पाइप लाइन के साथ 38 किमी कुल पाइप लाइन डाली जानी है।

ऐसा हो तो दोहरा समाधान
बीजेएस से मुख्य पाइप लाइन डालकर कुड़ी हौद तक पानी ले जाया जा रहा है। कुड़ी हौद से आगे रीको औद्योगिक क्षेत्र के लिए 10 लाख की राशि रीको ने जमा करवाई है। डीपीआर बनाने का काम चल रहा है। जब तक औद्योगिक क्षेत्र नहीं बनेगा, यह पानी नदी में बहाया जाएगा। यदि समय रहते औद्योगिक क्षेत्र का काम पूरा कर लिया जाता है तो शहर की भूजल समस्या का निदान होगा और करोड़ों रुपए खर्च कर पूरे किए गए प्रोजेक्ट का भी लाभ मिलने लगेगा।

इनका कहना है...
मुख्य पाइप का काम पूरा हो गया है। 20 से ज्यादा ट्यूबवेल पॉइंट जोड़ दिए हैं। बाकी के लिए काम चल रहा है। फिलहाल कुड़ी हौद के समीप जोजरी नदी में पानी डाला जा रहा है, जिससे कि पर्यावरण संतुलन के एनजीटी के आदेशों की पालना हो सके। रीको ने कुड़ी हौद से आगे पानी लेने का एमओयू किया था।
- निर्मलसिंह कच्छवाह, अधीक्षण अभियंता, पीएचईडी प्रोजेक्ट

कुड़ी हौद से आगे पानी ले जाने के लिए डीपीआर बन रही है। आगे का प्रोजेक्ट बनने के बाद रीको हमने कनेक्शन लेगा।
- दिनेश कुमार पेडीवाल, अधीक्षण अभियंता, पीएचइडी शहर

Updated on:
14 Nov 2019 10:42 am
Published on:
14 Nov 2019 10:42 am