जोधपुर

घरों से निकलने वाले प्रदूषित पानी को साफ करने के लिए जोधपुर में हुआ अनूठा प्रयोग

विश्व पर्यावरण दिवस विशेष :- जोधपुर नगर निगम के इंजीनियर व राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय कोटा के प्रोफेसर का संयुक्त शोध- टर्सरी तकनीक पर सीवरेज पानी शोध होने पर हो सकेगी उपयोग  
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Jun 05, 2020
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जोधपुर.
घरों से सीवरेज के जरिये निकलने वाले प्रदूषित पानी में पिछले कुछ साल में हैवी मेटल्स की मात्रा बढ़ गई है। जोधपुर सहित प्रदेश के प्रमुख नगरीय निकायों में संचालित सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट में इन मेटल्स को रिमूव करने की क्षमता नहीं है। ऐसे में एक नई इको-फ्रेंडली तकनीक पर शोध किया गया है, जिसके परिणाम भी सकारात्मक आए हैं। अब इसको पेटेंट करवाने सहित निकायों में उपयोग करने की उम्मीद भी जगी है।

राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय कोटा के डीन व प्रोफेसर अनिल के. माथुर और जोधपुर नगर निगम के पर्यावरण इंजीनियर व हेल्थ ऑफिसर सचिन मौर्य ने इस पर शोध किया है। इस फाइटोरेमीडियेटर तकनीक पर 28 दिन तक लगातार शोध किया गया है। कम लागत और इको-फ्रेंडली तकनीक के जरिये हेवी मेटल्स को हटाने की तकनीक के सकारात्मक परिणाम मिलने के नेशनल एनवायरमेंटल इंजीनियरिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट (नीरी) सहित अन्य संस्थान इसके प्रोटोटाइप तैयार करने में जुटे हैं।
इन पर किया शोध

दो जलोप पादत ट्रेपाविपीनोसा और पिस्टिया स्ट्रोटाफाइटस को प्रदूषित पानी में प्लांट कर उसके परिणाम हर 7 दिन बाद कुल 28 दिनों तक अंकित किए गए। इसमें बीओडी, सीओडी, क्लोराइड, नाइट्रेट, लैड, कैडमियम और क्रोमियम जैसे तत्व 78 से लेकर 84 प्रतिशत तक कम हुए।
टर्सरी तकनीक में उपयोग

शोधकर्ता मौर्य ने बताया कि जोधपुर में अभी सैकंडरी तकनीक पर सीवरेट ट्रीटमेंट प्लांट संचालित हो रहे हैं। जल्द ही इसी तकनीक को अपनाते हुए टर्सरी तकनीक पर प्लांट संचालित होंगे। इसे प्रदेश के अन्य निकाय भी अपना सकते हैं।

Published on:
05 Jun 2020 05:22 pm