जोधपुर

जोधपुर को गोलियों की आवाज से आतंकित करने वालों ने किए कई खुलासे, सामने आए दरिंदगी के दूसरे सच

चार अन्य आरोपियों की तलाश जारी  
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Updated: 22 Oct 2017, 4:44 PM IST
firing accused in Jodhpur revealed new things in interrogation
firing accused in Jodhpur revealed new things in interrogation

रंगदारी के लिए फायरिंग मामले में फरार बदमाशों की धरपकड़ के लिए संदिग्धों से पूछताछ में चौपासनी बाइपास पर पेट्रोल पंप पर दो साल पहले हुई एक लूट का खुलासा हो गया। राजीव गांधी नगर थाना पुलिस ने एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। जबकि चार अन्य की तलाश जारी है।

थानाधिकारी लेखराज सियाग ने बताया कि 17 मई 2015 में चौपासनी बाइपास पर नरपत पेट्रोल पंप पर गाड़ी में सवार पांच जने आए थे और पंप पर रखी टेबल उठा कर ले भागे थे। जिसमें पांच-छह हजार रुपए रखे थे। फायरिंग के आरोपी हरेन्द्र उर्फ हीरा जाट की धरपकड़ के लिए पुलिस ने कुछ संदिग्धों से पूछताछ की थी। इनमें शामिल सेतरावा निवासी गोपालसिंह पुत्र जब्बरसिंह ने यह वारदात करना स्वीकार कर लिया, जिस पर उसे राजीव गांधी नगर थाना पुलिस को सौंप दिया गया। उसे गुरुवार को गिरफ्तार कर के शिनाख्त परेड के लिए शुक्रवार को न्यायिक अभिरक्षा में भेजा गया। उससे पूछताछ के आधार पर वारदात में शामिल चार अन्य की तलाश की जा रही है।

दीपावली पर राहत की सांस ली जोधपुर पुलिस ने


सात से अधिक महीने से अपनी किरकिरी करवा रही जोधपुर पुलिस की लाज दीपावली पर बच गई। पांच दिन में गुजरात, पंजाब व राजस्थान के बीच अ_ाईस सौ किलोमीटर की भागदौड़ करने के बाद दो शातिर शूटरों के साथ चार जनों को पकड़ कर त्योहार पर कुछ राहत की सांस ली।

रंगदारी के लिए फायरिंग कर के दहशत फैलाने वाला हरेन्द्र उर्फ हीरा जाट साढ़े सात महीने से और वासुदेव इसरानी को गोली मारने वाला भोमाराम एक महीने से पुलिस को चकमा दे रहे थे। इनके पकड़ में न आने पर पुलिस को भी दीपावली पर कोई अप्रिय घटना होने की आशंका थी, लेकिन दीपावली से दो दिन पहले हरेन्द्र के गांधीनगर में होने की जानकारी हाथ लगी थी। पुलिस दल के साथ एसआई सोमकरण व हैड कांस्टेबल जमशेद खान को रात में ही रवाना किया गया था, जहां से गुरुवार शाम हरेन्द्र व अनमोल को पकड़ा गया। इन्हें लेकर पुलिस शुक्रवार तड़के तीन-चार बजे जोधपुर पहुंची और आरोपियों को बासनी थाने में रखवाया। बारह सौ किलोमीटर यात्रा की थकान उतर पाती उससे पहले ही भोमाराम के चंडीगढ़ में होने का पता लगा। तब दोनों पुलिसकर्मियों के साथ टीम को भोमाराम की तलाश में चण्डीगढ़ रवाना कर दिया गया, जहां से पुलिस ने भोमाराम व साथी को पकड़ लिया। सोलह सौ किलोमीटर की यात्रा पूरी कर के टीम शनिवार सुबह जोधपुर पहुंची।

हत्या में लॉरेंस की भूमिका साबित करना चुनौतीपूर्ण


वासुदेव की हत्या 17 सितम्बर को हुई थी। उन दिनों लॉरेंस विश्नोई सीकर जिले के पूर्व सरपंच सरदार राव की हत्या के आरोप में एसओजी के रिमाण्ड पर था। ऐसे में पुलिस के लिए यह साबित करना मुश्किल है कि वासुदेव की हत्या लॉरेंस ने ही करवाई थी। हालांकि उसकी हत्या की साजिश पहले ही रची जा चुकी थी, लेकिन तब भी वह अजमेर जेल में ही था। यही वजह है कि पुलिस उसे गिरफ्तार करने से पहले ठोस साक्ष्य व सुबूत जुटाना चाहती है, ताकि उसे कोर्ट में भी साबित किया जा सके।

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