
शहर में विकास कार्यों के लिए दस साल पहले जारी आदेशों की अवमानना मामले की सुनवाई मंगलवार को राजस्थान हाईकोर्ट में जस्टिस जीके व्यास और जुस्टिस विनीत माथुर की खंडपीठ में हुई। सुनवाई के दौरान पेश हुए जिला कलक्टर, जोधपुर विकास प्राधिकरण (जेडीए), नगर निगम व हाउसिंग बोर्ड कमिश्नर सहित डीसीपी ट्रैफिक पेश हुए। उनसे वर्ष २००७ में हाईकोर्ट की ओर से जारी आदेशों की पालना के सम्बन्ध में शपथ पत्र मांगा तो सरकार की ओर से विकास कार्यों की पालना नहीं कर सकने के लिए कोर्ट के निर्देशों को ही जिम्मेदार ठहरा दिया गया।
महेंद्र लोढ़ा की ओर से दायर याचिका की सुनवाई के दौरान पहले जेडीए की ओर से कहा गया कि उनके पास सीमित साधन है तथा नए प्रोजेक्ट नहीं बन रहे हैं, इसलिए राशि नहीं आ रही। इस पर राज्य सरकार की ओर से पेश हुए अतिरिक्त महाधिवक्ता राजेश पंवार ने कहा कि राजस्थान पत्रिका के प्रधान संपादक गुलाब कोठारी मामले में कोर्ट ने ही विभिन्न निर्देश जारी करते हुए नए प्रोजेक्ट्स पर रोक लगा दी है। इसलिए स्थानीय निकायों के पास पैसा कहां से आएगा। कोर्ट को इस मामले में सहयोग करना चाहिए। इस पर याचिकाकर्ता वकील अशोक छंगाणी ने कहा कि सरकार गलत बयान दे रही है। कोर्ट ने मास्टरप्लान की पालना करते हुए नियमानुसार योजना बनाने को कहा है, जबकि सरकार गलत तरीके से काम करना चाहती है। काम ये खुद गलत कर रहे, और दोष कोर्ट पर लगा रहे हैं।
इस बहस को टालते हुए खंडपीठ ने सभी अधिकारियों से पालना बाबत शपथ पत्र पेश करने का कहा, लेकिन उसमें समय बद्ध तरीके से पालना करने का जिक्र नहीं था। एेसे में खंडपीठ ने आगामी १ फरवरी तक कोर्ट के आदशों की समयबद्ध तरीके से पालना करने बाबत शपथपत्र पेश करने के निर्देश दिए। खंडपीठ में जिला कलक्टर डॉ. रविकुमार सुरपुर, एडीएम- प्रथम (शहर)सीमा कविया, जेडीए आयुक्त दुर्गेशकुमार बिस्सा, नगर निगम आयुक्त ओपी कसेरा, डीसीपी ट्रैफिक भारत भूषण, एसीपी ट्रैफिक रामसिंह चारण, डिप्टी कमिश्नर आवासन मंडल आदि उपस्थित रहे।
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बहू के लैपटॉप पर अश्लील वीडियो अपलोड करने के आरोपी ससुर की दुबारा जमानत खारिज
जोधपुर.राजस्थान हाईकोर्ट के न्यायाधीश मनोज गर्ग ने ससुर की दूसरी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी, जिस पर अपने बेटे की पत्नी के लैपटॉप व मोबाइल पर अश्लील वीडियो अपलोड करने का आरोप है। पीडि़ता के अधिवक्ता रमेश पुरोहित ने बताया कि पीडि़ता राजसमंद की रहने वाली है। उसने राजसमंद के महिला थाने में ससुर व पति सहित अन्य के खिलाफ आईटी एक्ट और दहेज प्रताडऩा का केस दर्ज करवाया था।
राजकोट (गुजरात) के रहने वाले आरोपी ससुर जयेशकुमार ने गिरफ्तारी से बचने के लिए पिछले महीने भी राजस्थान हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत लेने का प्रयास किया था, लेकिन न्यायाधीश महेंद्र माहेश्वरी ने वह आवेदन खारिज किया था। आरोपी ससुर ने पच्चीस दिन बाद हाईकोर्ट में दुबारा अग्रिम जमानत के लिए आवदेन पेश किया। न्यायाधीश मनोज गर्ग ने सुनवाई के बाद अग्रिम जमानत आवेदन खारिज कर दिया। पीडि़ता ने आरोपी लगाया था कि उसके ससुर जयेशकुमार ने पीडि़ता का जीमेल एकाउंट हैक कर उसके मोबाइल व लैपटॉप पर अपनी और उसकी ***** यानि मासी सास के अश्लील विडियो क्लिप डाल दिए हैं। बहू का कहना है कि इससे जाहिर होता है कि कहीं ना कहीं ससुर की नियत भी ठीक नहीं थी।
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लापरवाही से बच्चे की मृत्यु के आरोपी बरी
जोधपुर. न्यायिक मजिस्ट्रेट जोधपुर जिला की पीठासीन अधिकारी मेघना व्यास ने ९ साल पुराने लापरवाही से एक बच्चे की मृत्यु कारित किए जाने के एक मामले मे दो अभियुक्तों को सुबूतों के अभाव में बरी कर दिया। मजिस्ट्रेट ने हस्तलिखित 15 पन्नों के फैसले में लिखा कि अभियोजन ने 12 में से 7 गवाहों को बतौर चश्मदीद गवाह न्यायालय के समक्ष पेश किया, परंतु एक भी गवाह मुल्जिमान की शिनाख्त करने के सम्बन्ध में कोई ठोस बयान नहीं दे सका। इन गवाहों के विरोधाभासी बयान से यह भी साबित नहीं हो सका कि ये गवाह घटनास्थल पर मौजूद थे।
आरोपी राधेश्याम की ओर से अधिवक्ता सुकेश भाटी और मूसे खान की ओर से मिथुन शर्मा ने अभियुक्तों के किसी भी अपराध में लिप्त होने से इनकार किया । सहायक लोक अभियोजन अधिकारी ने कहा कि अभियुक्तों की लापरवाही से ही एक मासूम बच्चे की मृत्यु हुई है। मजिस्ट्रेट ने दोनों पक्षों को सुन कर फैसले में कहा कि अनुसंधान के महत्वपूर्ण साक्ष्य घटनास्थल के फोटो, वैल्डिंग मशीन,लोहे की रॉड व दरवाजा आदि पत्रावली में शामिल नहीं होने और घटनास्थल से 30 मीटर की दूरी पर पुलिस चौकी होने पर भी प्रार्थी की ओर से प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज नहीं करना संदेहास्पद प्रतित होता है। मजिस्ट्रेट ने आरोपियों को भारतीय दण्ड संहिता की धारा 288 और 304 ए के आरोपों से मुक्त करने का आदेश दिया।
मामले के अनुसार 11 अप्रेल 2009 को चांदपोल निवासी रामसिंह ने खाण्डा फलसा पुलिस थाने में एक रिपोर्ट दर्ज करवाई थी। इसमें बताया गया कि उसका 14 वर्षीय भान्जा राजेश माली पुष्टिकर स्कूल में परीक्षा देकर पैदल ही लाडजी के कुआ के पास स्थित राज अल्पाहार के पास से जा रहा था। इस दौरान रेस्टोरेंट में लोहे के दरवाजे की मरम्मत की जा रही थी । प्रार्थी ने आरोप लगाया कि रेस्टोरेंट के मालिक राधेश्याम और वैल्डर मुश्ताक उर्फ मूसे खान की लापरवाही से दरवाजा राजेश पर गिर गया और वह गंभीर रूप से जख्मी हो गया। इलाज के दौरान छात्र की मौत हो गई थी। पुलिस ने अनुसंधान कर कोर्ट में चालन पेश किया, जहां आरोपियों को सुबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया।
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इंश्योरेंस के नाम पर लाखों की ठगी के आरोपी को हाईकोर्ट से जमानत
जोधपुर. शास्त्रीनगर पुलिस थाना क्षेत्र अंतर्गत दर्ज हुए 33 लाख रुपए की ठगी के मामले में गिरफ्तार नई दिल्ली के पंकज राणा को आखिरकार राजस्थान हाईकोर्ट से जमानत मिल गई।
शास्त्रीनगर पुलिस थाने में रानी पारवानी ने मुकदमा दर्ज करवाते हुए कहा था कि इंश्योरेंस पॉलिसी के बहाने उससे 33 लाख रुपए ठगे गए हैं, जिस पर कार्रवाई करते हुए पुलिस ने दिल्ली में कॉल सेंटर चलाने वाले नंदकिशोर, राजनकुमार बैरवा व पंकज राणा को गिरफ्तार कर लिया था। आरोपी पंकज राणा की ओर से अधिवक्ता रजाक के. हैदर व उमेश कल्ला ने पैरवी करते हुए कहा कि प्रार्थी ने नंदकिशोर के कॉल सेंटर में कुछ दिन काम किया था। इसलिए उसने अपने पहचान के दस्तावेज कॉल सेंटर में जमा करवाए। उसके दस्तावेज का दुरुपयोग करते हुए सिम ली गई है और उससे ठगी की गई होगी। प्रार्थी का अपराध से कोई सम्बन्ध नहीं है, उसे झूठा फंसाया गया है। सरकारी वकील ने जमानत का विरोध किया। दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद न्यायाधीश मनोजकुमार गर्ग ने आरोपी पंकज राणा को जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया।
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