जोधपुर

ममता की जीत: नाबालिग लड़की को नारीशाला से लाकर बच्चे के साथ किया पेश, तीन लाख भी मिले

सरकारी अधिवक्ता ने कहा- पीडि़त प्रतिकार योजना के तहत नाबालिग के नाम से 3 लाख की एफडीआर बनवा दी गई लड़की को बच्चे सहित मां के साथ भेजा
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Updated: 12 Jan 2018, 2:54 PM IST
Hearing of habeas corpus petition in Jodhpur High Court
Hearing of habeas corpus petition in Jodhpur High Court

एक नाबालिग लड़की को घर से भगाकर ले जाने के मामले में उसकी मां की ओर से राजस्थान उच्च न्यायालय में दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण मामले में करीब चार महीने पहले दस्तयाब कर अजमेर स्थित नारीशाला में रखी गई लड़की को गुरुवार को कोर्ट में पेश किया गया। नारीशाला में रहने के दौरान उसका प्रसव हुआ और तीन महीने के बच्चे के साथ वह न्यायाधीश संगीत लोढ़ा व न्यायाधीश मनोजकुमार गर्ग की खंडपीठ में पेश हुई। वहां उससे व्यक्तिगत रूप से बात करने के बाद खंडपीठ ने लड़की के बच्चे सहित लड़की की मां के साथ भेज दिया। खंडपीठ ने पुलिस को कोर्ट से उनके घर तक व बाद में भी उसकी सुरक्षा के मद्देनजर भीलवाड़ा पुलिस अधीक्षक के नाम से आदेश जारी किया।

कोर्ट में एक नाबालिग लड़की को भगा ले जाने के सम्बन्ध में बंदी प्रत्यक्षीकरण मामला लड़की की मां की ओर से अधिवक्ता वीआर चौधरी के माध्यम से दायर किया गया था। कोर्ट के आदेश से पुलिस की ओर से दस्तयाब करने के बाद उसे अजमेर नारीशाला में रखा गया, तब वह लड़की गर्भवती थी और उसके परिजनों से उसके गर्भपात की इजाजत मांगी गई थी, लेकिन पहले कोर्ट के आदेश से मेडिकल बोर्ड ने उसकी जांच कर गर्भपात करने की इजाजत नहीं दी। करीब तीन महीने पहले उसने एक बच्चे को जन्म दिया। इस दौरान कोर्ट ने पीडि़ता को पीडि़त प्रतिकार योजना के तहत 3 लाख रुपए की राशि का भुगतान करने का आदेश दिया था।

पीडिता के नाम एफडीआर बनाई


गुरुवार को खंडपीठ में एएजी व जीए शिवकुमार व्यास ने बताया कि कोर्ट के 5 जून 2017 के आदेशानुसार पीडि़ता के नाम से 3 लाख की एफडीआर भीलवाड़ा में बैंक ऑफ बड़ोदा की एक शाखा में बना दी गई है। इस पर खंडपीठ ने भीलवाड़ा स्थित जिला विधिक सेवा समिति के नाम आदेश जारी करते हुए कहा कि समिति यह सुनिश्चित करेगी कि एफडीआर का ब्याज प्रत्येक माह के प्रथम सप्ताह में पीडि़ता के खाते में जमा कर दिया जाए। उन्होंने साथ ही यह भी कहा कि नाबालिग लड़की को भगाकर ले जाने के आरोपी को दस्तयाब कर लिया गया और उसके खिलाफ अनुसंधान के बाद चार्जशीट दायर कर दी गई है। इस पर आगे के आदेश के लिए खंडपीठ ने मामले की अगली सुनवाई 29 जनवरी को करने का आदेश दिया है।

डॉ. अमिलाल भाट का आवेदन


खंडपीठ ने कहा कि इसी मामले के तहत डॉ. एसएन मेडिकल कॉलेज के पूर्व प्रिंसिपल डॉ. अमिलाल भाट की ओर से हाईकोर्ट की को-ऑर्डिनेट बैंच की ओर से 8 नवंबर 2017 को जारी आदेश वापस लेने के सम्बन्ध में आवेदन एपीपीएलडब्ल्यू 148/18 को उचित रूप से सूचीबद्ध करने का आदेश 10 जनवरी 2017 को ही जारी कर दिया था।

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