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बेटी और पत्नी को मिला हक, पटवारी की जमानत मंजूर, एड्स संक्रमित रक्त पर मांगा जवाब

जोधपुर की कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में एक व्यक्ति को घर से निकाली गई पत्नी व बालिग बेटी को हर महीने दस हजार रुपए देने का आदेश दिया है।    
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जोधपुर

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Harshwardhan Singh Bhati

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Updated: 12 Jan 2018, 12:09 PM IST

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अतिरिक्त सिविल मजिस्ट्रेट संख्या आठ की पीठासीन अधिकारी वैदेहीसिंह चौहान ने घर से निकाली गई विवाहिता द्वारा अपने पति के खिलाफ घरेलू हिंसा के कानून के तहत दायर एक परिवाद पर फैसला करते हुए पत्नी तथा उसकी बालिग लड़की को हर महीने दस हजार रुपए देने का आदेश दिया है। महिला की 34 साल पहले शादी हुई थी। मजिस्ट्रेट ने अपने आदेश में लिखा कि अविवाहित पुत्री के भरण-पोषण और अध्ययन व पत्नी की दैनिक जरूरतें पूरी करना पति का नैतिक दायित्व है। जोधपुर . राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को संक्रमित रक्त चढऩे से एड्स के बढ़ते मामलों में विकल्प तलाशने के निर्देश दिए हैं। हाईकोर्ट ने इसके लिए सरकार को छह सप्ताह का समय दिया है।मामले के अनुसार चौपासनी हाउसिंग बोर्ड के 18 सेक्टर निवासी पीडि़ता सरस्वतीदेवी ने अपने अधिवक्ता हेमंत बावेजा के मार्फत एक परिवाद न्यायालय में पेश किया था।

इसमें बताया गया कि उसका वर्ष 1984 में माजीसा कॉलोनी बालोतरा निवासी किशोरकुमार चारण के साथ विवाह हुआ था। विवाह के बाद सात बच्चों का जन्म हुआ। प्रार्थिया ने आरोप लगाया कि कुछ समय पहले पति ने मारपीट कर बच्चों के साथ घर से निकाल दिया। यह भी आरोप लगाया कि पति ने तलाक लिए बिना एक अन्य महिला को पत्नी के रूप में रख लिया। पति के अधिवक्ता ने कहा कि पत्नी मायके के बहकावे में आकर आरोप लगा रही है और खुद ही घर छोड़ कर गई है। मजिस्ट्रेट ने पति को पुत्री और पत्नी को हर महीने दस हजार रुपए देने का आदेश दिया और प्रार्थिया के साथ किसी भी प्रकार की घरेलू हिंसा नहीं करने के लिए पाबंद किया।

पटवारी व व्याख्याता की अग्रिम जमानत याचिका नामंजूर

जोधपुर. जिला एवं सेशन न्यायालय ने गुरुवार को पंचायत समिति लूणी के प्रधान पद के लिए चुनाव में उम्मीदवार लूणी प्रधान नीरज कंवर के कथित फर्जी प्रमाण पत्र को तस्दीक करने वाले तत्कालीन पटवारी किशनसिंह और सरकारी स्कूल के व्याख्याता मगसिंह की ओर से दायर अग्रिम जमानत आवेदन खारिज कर दिया। इस मामले में लूणी प्रधान नीरज कंवर की अग्रिम जमानत अर्जी मंगलवार को इसी न्यायालय में खारिज हो चुकी है।गौरतलब है कि लूणी प्रधान के चुनाव में ओबीसी सर्टिफिकेट के मामले में सीआईडी सीबी ने प्रधान सहित सात आरोपियों के विरुद्ध आरोप प्रमाणित माना हैं। जांच में पटवारी किशनसिंह द्वारा नीरज कंवर की ओबीसी जाति तथा व्याख्याता मगसिंह द्वारा उसके आय प्रमाण पत्र को तस्दीक करने का आरोप लगाया गया है। दोनों आरोपियों ने गिरफ्तारी से बचने के लिए गुरुवार को अग्रिम जमानत का प्रार्थना पत्र जिला न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया था। लोक अभियोजन अधिकारी तथा परिवादी के अधिवक्ता मनीष व्यास ने जमानत दिए जाने का विरोध किया।

संक्रमित रक्त से एड्स के बढ़ते मामलों में विकल्प तलाश करे सरकार : हाईकोर्र्ट

मुख्य न्यायाधीश प्रदीप नंद्राजोग व न्यायाधीश आरएस झाला की खंडपीठ में अधिवक्ता व याचिकाकर्ता रितुराज सिंह की ओर से संक्रमित रक्त से बढ़ते एड्स के मामलों को लेकर पेश की गई जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद ये निर्देश दिए। सरकार की ओर से एएजी श्यामसुंदर लादरेचा व उनके सहयोगी विकास चौधरी ने बताया कि सरकार अपने स्तर पर हरसंभव प्रयास कर रही है। आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल से ही रक्त की जांच की जा रही है। यह कहा गया याचिका मेंसंक्रमित रक्त से एड्स के बढ़ते मामलों को लेकर जनहित याचिका पेश की गई थी। इसमें बताया गया कि वर्तमान में रक्त जांच के लिए जो मशीनें हैं, वे सटीक जांच नहीं कर पाती हैं। इसकी वजह से कई लोगों को संक्रमित रक्त चढ़ा दिया जाता है। ऐसे 55 लोगों को एड्स भी हो गया है। याचिकाकर्ता कहना है कि अस्पतालों में एनएएटी व आधुनिक मशीनें लगाई जाएं, ताकि रक्त जांच सटीक हो सके।

छात्र को शिक्षा के अधिकार से वंचित करने पर हाईकोर्ट का नोटिस

जोधपुर.राजस्थान हाईकोर्ट की न्यायाधीश निर्मलजीत कौर ने जन्म प्रमाण पत्र के आधार पर एक मासूम छात्र को स्कूल प्रशासन की ओर से नि : शुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा के अधिकार से वंचित करने को गंभीरता से लेते हुए छात्र को तत्काल प्रवेश देने का आदेश दिया है। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने शिक्षा विभाग के प्रमुख शासन सचिव, प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय राजस्थान के निदेशक, जोधपुर के जिला शिक्षा अधिकारी (प्रारंभिक) और आदित्य बिड़ला पब्लिक स्कूल खारिया खंगार को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब तलब किया है।

खारिया खंगार निवासी श्रवणकुमार सुथार के मासूम पुत्र हेमंत जांगिड़ की ओर से राजस्थान हाईकोर्ट में अधिवक्ता रजाक के. हैदर व उमेश कल्ला ने पैरवी करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता ने नि : शुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 के तहत ऑनलाइन आवेदन किया था। लॉटरी प्रक्रिया में चयनित होने के बाद उसे प्रवेश के लिए पात्र घोषित किया गया, लेकिन आदित्य बिड़ला पब्लिक स्कूल ने उसे इस आधार पर प्रवेश से वंचित कर दिया कि उसने सम्बन्धित विभाग से जन्म प्रमाण पत्र लॉटरी दिनांक के बाद में प्राप्त किया है।