अभी पानीपत रिफाइनरी से खरीद करता है पड़ोसी देश पाकिस्तान
बाड़मेर में पचपदरा में लगने वाली रिफाइनरी कम पेट्रोकेमिकल कॉम्पलेक्स से राजस्थान के साथ-साथ पाकिस्तान को भी फायदा होगा। रिफाइनरी में तैयार पेट्रोकेमिकल उत्पाद पश्चिमी सीमा से पाकिस्तान निर्यात किए जा सकेंगे। पाकिस्तान को यह काफी सस्ता पड़ेगा। वर्तमान में पाकिस्तान को हरियाणा स्थित पानीपत रिफाइनरी से उत्पाद भेजे जाते हैं।
पाकिस्तान में कराची सहित केवल तीन रिफाइनरी ही हैं। वे भी काफी पुरानी तकनीक से काम करती हैं। एेसे में पाकिस्तान में पेट्रोलियम पदार्थों की काफी किल्लत रहती है। भारत सद्भावना के नाते पाकिस्तान को कभी-कभार पेट्रोल और डीजल निर्यात कर देता है, लेकिन पेट्रोकेमिकल्स उत्पाद पाकिस्तान को लगातार निर्यात किया जाता है। क्रूड ऑयल के रिफाइन के समय पेट्रोलियम उत्पादों के अलावा कई रासायनिक उत्पाद एथनॉल, पॉलीएथिलिन, एथिलिन ऑक्साइड, विनाइल एसिटेट, एथिलिन ग्लाइकॉल, ग्लाइकॉल ईथर, विनाइल क्लोराइड, बैंजीन, टालुईन, जॉइलोन शामिल है। इनसे पॉलिमर, प्लास्टिक, रेजिन, डिटरजेंट, नाइलॉन, फाइबर, ल्यूब्रिकेंट तैयार किया जाता है। पचपदरा में आधुनिक तकनीकी यानी बीएस-६ (भारत स्टैंडर्ड) मानक की रिफाइनरी लगेगी। इसके उत्पाद गुणवत्ता वाले होंगे। देश में वर्तमान में बीएस-४ मानक लागू है। रिफाइनरी बनकर तैयार होगी, जब तक बीएस-६ मानक आ जाएंगे।
रिफाइनरी से बदलेगी तकदीर
- पचपदरा में हिंदुस्तान पेट्रोलियम और राज्य सरकार के संयुक्त उपक्रम के रूप में रिफाइनरी करीब ४३ हजार करोड़ की लागत से बनेगी। प्रत्यक्ष तौर रिफाइनरी में ३५०० लोगों को रोजगार मिलेगा और परोक्ष तौर पर १० हजार लोग रोजगार पाएंगे। पेट्रोकेमिकल्स इण्डस्ट्री स्थापित होने से पांच हजार लोगों को और रोजगार मिल सकेगा।
- वर्तमान में बाड़मेर में उत्पादित करीब दो लाख बैरल क्रूड ऑयल रिफाइन होने के लिए पाइप लाइनों से गुजरात भेजा जाता है। रिफाइनरी लगने के बाद सारा क्रूड से प्रदेश में ही पेट्रोलियम उत्पादों में तैयार हो सकेंगे।
- बाड़मेर में ३४ उत्पादन क्षेत्रों में २५० तेल कुओं के माध्यम से देश की कुल क्षमता का एक चौथाई तेल उत्पादन हो रहा है।
- रिफाइनरी की क्षमता ९० लाख टन है। इससे राज्य को सालाना ३४ हजार करोड़ की आय होगी।
- पेट्रोकेमिकल्स कॉम्पलेक्स होने से कई सारे उद्योग बाड़मेर, जोधपुर , पाली और आस-पास खुलेंगे। - रिफाइनरी से निकले पेटकॉक से २५० मैगावाट बिजली का उत्पादन हो सकेगा।
- बाड़मेर के गिरल प्लांट सहित प्रदेश के अन्य बिजली घरों के लिए बिटुमनी उपलब्ध हो सकेगा।
- एलपीजी को प्रोडक्शन प्रदेश में ही होने से घरेलू गैस की किल्लत नहीं रहेगी।
- औद्योगिक उद्देश्य के लिए काम आने वाले उत्पाद बाड़मेर ही बनने से अंतिम उत्पाद सस्ता तैयार होगा। प्लास्टिक के कई उत्पाद सस्ते पड़ेंगे।
- जोधपुर में इंटीग्रेटेड एनर्जी डवलपमेंट सिटी के तौर पर विकसित होने से निवेश बढ़ेगा।
- सड़क, बस और हवाई यातायात में इजाफा होगा। होटल सहित कई उद्योग लगेंगे।
- प्रदेश व केंद्र सरकार के कुछ नए सरकारी विभाग, सरकारी अधिकारी और आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध होंगी। पेट्रोलियम एक नजर में
- ४० लाख बैरल क्रूड ऑयल प्रतिदिन आयात करता है भारत
- ८२ फीसदी जरूरत का पेट्रोलियम आयात करना पड़ता है भारत को
- १७ फीसदी निष्कर्षित क्रूड ऑयल का निर्यात कर देता है भारत
- १०५ देशों को पेट्रोल-डीजल बेचता है भारत
- २३ रिफाइनरी हैं भारत में
- बीएस-४ मानक चलन में है भारत में