जोधपुर

Vivekananda का मारवाड़,राजस्थान और मुंशी फैज अली कनेक्शन

जोधपुर ( jodhpur news. current news ).स्वामी विवेकानंद का मारवाड़ से गहरा रिश्ता रहा है। वे माउंट आबू में बनी चम्पा नामक गुफा ( Champa cave ) में साधना और योगाभ्यास करते थे । ‘द लाइफ ऑफ स्वामी विवेकानंद-बाय हिज ईस्टर्न एंड वेस्टर्न डिसाइपल्स’ ( The Life of Swami Vivekananda-by His Eastern and Western Disciples ) और‘स्वामी विवेकानंद अर राजस्थान’ ( Swami Vivekananda Ar Rajasthan ) में पुस्तकों में इसका उल्लेख किया गया है। स्वामी विवेकानंद जयंती ( vivekananda birthday ) पर ये यादें ताजा हो उठी हैं।
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Jan 12, 2020
Vivekananda's connection to Marwar, Rajasthan and Munshi Faiz Ali
Vivekananda's connection to Marwar, Rajasthan and Munshi Faiz Ali

एम आई जाहिर /जोधपुर ( jodhpur news. current news ) . देश और दुनिया के लोगों के प्रेरणा स्रोत व आदर्श स्वामी विवेकानंद ( swami vivekananda ) का मारवाड़ से गहरा रिश्ता रहा है। पूरे देश और दुनिया को जगाने वाले हमारे स्वामी विवेकानंद अपने गुरु परमहंस रामकृष्ण के देवलोक होने के बाद स्वामी रमता जोगी बन गए थे। अगले पांच बरस तक किसी को पता नहीं था कि विवेकानंद कहां हैं? इस भ्रमण के दौैरान ही वे मारवाड़ के माउंट आबू आए थे। स्वामी जी नक्की झील के ऊपर एकांत में बनी चम्पा नामक गुफा ( Champa cave ) में साधना और योगाभ्यास करते थे। संयोग से यहां उनकी खेतड़ी के नरेश अजीतसिंह से भेंट हुई। स्वामी जी की अजीतसिंह से भेंट के बारे में प्रामाणिक जीवनी ‘द लाइफ ऑफ स्वामी विवेकानंद-बाय हिज ईस्टर्न एंड वेस्टर्न डिसाइपल्स’ ( The Life of Swami Vivekananda-by His Eastern and Western Disciples ) में यह जिक्र किया गया है। जयनारायण व्यास विवि छात्र सेवा मंडल के राजस्थानी संस्कृति प्रकोष्ठ की ओर से प्रकाशित व प्रो. कन्हैयालाल राजपुरोहित संपादित एक लघु पुस्तिका ‘स्वामी विवेकानंद अर राजस्थान ’ ( Swami Vivekananda Ar Rajasthan ) में भी इस बात का उल्लेख किया गया है। इसके अलावा उनकी सदभावना और सहृ़दयता की कुछ प्रामाणिक ( research ) और अनूठी मिसालों का भी जिक्र किया गया है। वहीं उनके बारे में सर्वमान्यता का भी उल्लेख किया गया है। स्वामी विवेकानंद जयंती ( vivekananda birthday ) पर ये यादें ताजा हो उठी हैं। पुस्तिका में उल्लेख है कि उन्होंने आदि गुरु शंकराचार्य के बताए मार्ग से उलट देश में उत्तर से दक्षिण दिशा में चलना शुरू किया और माउंट आबू पहुंचे। स्वामी जी के सभी जीवनीकारों ने खुद यह बात स्वीकार की है कि खेतड़ी नरेश स्वामी जी के सच्चे मीत और हितैषी थे।

सदभावना और सहृ़दयता कीप्रामाणिक और अनूठी मिसाल

हां,स्वामी विवेकानंद के माउंट आबू में रहने के दौरान स्वामी जी को किशनगढ़ रियासत के मुंशी फैज अली ( Munshi Faiz Ali ) ने वहां से निकलते हुए देखा तो वे उनकी विद्वता से बहुत प्रभावित हुए और उनके शैदाई हो गए। मुंंशी ने कहा, मैं अकेला हूं, किशनगढ़ की कोठी में रहने के लिए चलें। इतना स्नेह देख स्वामी जी मना न कर सके। वे वहां रहे। पास में ही खेतड़ी रियासत की कोठी भी थी। तब खेतड़ी के दीवान जगमोहनलाल ने पूछा कि स्वामी जी आप यहां इस जगह? स्वामी जी ने कहा, समस्त मानव एक ही ईश्वर की संतान हैं।

-प्रो. कन्हैयालाल राजपुरोहित
पूर्व संस्थापक सचिव व उपाध्यक्ष, विवेकानंद केंद्र, कन्हैयाकुमारी शाखा, जोधपुर

Published on:
12 Jan 2020 05:26 pm