जोधपुर

सालों से डेंगू टीके का इंतजार, लेकिन अभी सभी खाली हाथ

    वायरस के अलग-अलग स्ट्रेन के चलते भारत में चल रहा चिंतन-मंथन
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Oct 20, 2021
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जोधपुर. कोरोना के बीच देश में डेंगू वायरस अब त्राही-त्राही मचा रहा है, लेकिन अभी तक हमारे देश के हाथ खाली ही हैं। डेंगू वायरस के मल्टीपल स्ट्रेन के चलते टीका बाजारों में नहीं आ पा रहा है। टीके की सफलता-असफलता के बीच कई देशों में डेंगू के बचाव को लेकर किसी टीके को अनुमति तक नहीं दी जा रही है। भारत में भी सरकार विस्तृत परीक्षणों पर ही काम कर रही है। डेंगू की चार स्ट्रेन हैं। चारों स्ट्रेन के खिलाफ कार्य करने वाली वैक्सीन अभी किसी देश में विकसित नहीं हुई है।

दूसरी बार डेंगू हुआ तो और खतरनाक
जिन्हें दूसरी बार डेंगू इंफेक्शन होता है तो खतरा और बढ़ जाता है। ज्यादातर ऐसा होता था कि एक बीमारी से दूसरी बार बीमार होने पर उसके खिलाफ शरीर में एंटीबॉडी तैयार होती है, लेकिन डेंगू में ऐसा नहीं होता है। इसी कारण विभिन्न देश वैक्सीन डवलपमेंट को लेकर लगातार विफल हो रहे हैं।

मल्टीपल स्ट्रेन के कारण वैक्सीन चुनौती

माइक्रोबायोलॉजी में एंटीजैनिक सिन नामक सिद्धांत होता है। उसमें माना जाता है कि ऐसी बीमारी के लिए वैक्सीन बनाना चुनौती है, जिसमें मल्टीपल स्ट्रेन हैं। क्योंकि इसमें एंटीबॉडी सिर्फ एक ही स्ट्रेन के विरुद्ध बनेगी। जबकि मानव शरीर में बीमारियों के खिलाफ विभिन्न तरह के सेल नेव बनाते हैं, जबकि वैक्सीन लगने के बाद सभी एक ही तरह की एंटीबॉडी बनाने में जुट जाते है, इससे नई एंटीबॉडी तैयार होने में मुसीबतें होंगी। क्योंकि इससे शरीर का केवल एक ही एंटीबॉडी से इंट्रोडेक्शन हो जाता है। जो आगे जाकर शरीर में अन्य वायरस के प्रवेश पर खतरा पैदा कर देते हैं।

क्या कहते हैं विशेषज्ञ
कोई भी मल्टीपल स्ट्रेन वाली बीमारी हो, उसमें वैक्सीन डवलप करना सबसे बड़ी चुनौती माना जाता है। दूसरा डेंगू में पाया जाता है कि पहली बार के बाद दूसरी बार इंफेक्शन होता है तो वह बेहद घातक होता है। ये बातें सिर्फ डेंगू में होती है, जो दूसरी बीमारी में नहीं होती। इस कारण डेंगू को अलग से पढ़ाया जाता है। इसका प्रिंसिपल अलग बीमारियों में काम नहीं करता। इसीलिए विश्व स्वास्थ्य संगठन इसको बेहद सावधानी से वैक्सीन देने की बात कह रहा है। मई 2019 में यूनाइटेड स्टेट में डेंगू वैक्सीन अप्रूवड की गई, भारत में अभी अप्रूवल को लेकर चिंतन-मंथन जारी है। कुछ स्टडी भी चल रही है।

- डॉ. पंकज भारद्वाज, एडिशनल प्रोफेसर, कम्यूनिटी मेडिसिन एंड फैमिली मेडिसिन

Published on:
20 Oct 2021 11:21 pm