जोधपुर

शहर का एक ऐसा सरकारी अस्पताल, जहां के डॉक्टर्स को हैं मरीजों का इन्तजार

कमला नेहरू नगर स्थित इएसआई अस्पताल प्रतिदिन आ रहे औसत 50 मरीज- स्टॉफ की तनख्वाह व रखरखाव पर प्रतिमाह खर्च हो रहे 62 लाख से अधिक - रेडियोलोजिस्ट लम्बे समय से नहीं, दूरी प्रमुख कारण
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Jul 28, 2020
शहर का एक ऐसा सरकारी अस्पताल, जहां के डॉक्टर्स को हैं मरीजों का इन्तजार
शहर का एक ऐसा सरकारी अस्पताल, जहां के डॉक्टर्स को हैं मरीजों का इन्तजार

जोधपुर औद्योगिक इकाईयों आदि में काम करने वाले श्रमिकों को चिकित्सा सुविधा उपलब्ध करवाने के लिए कमला नेहरू नगर मेें बने ईएसआई अस्पताल को आज भी मरीजों का इन्तजार है। करीब 34 साल पुराने इस अस्पताल में पर्याप्त चिकित्सक व चिकित्सासुविधा होने के बावजूद रोजाना चंद मरीज ही उपचार के लिए पहुंच रहे है, उनमें से भी अधिकतर रेफर होने वाले मरीज होते है। जबकि हकीकत यह है कि अस्पताल में कार्यरत चिकित्साकर्मियों की सैलेरी, अस्पताल के रख-रखाव आदि पर प्रतिमाह 62 लाख रुपए से ज्यादा राशि खर्च हो रही है लेकिन दूरी के चलते यहां मरीज कम ही पहुंच रहे है।

रोजाना पहुंच रहे 45-50 मरीज
कमला नेहरू नगर में अस्पताल भवन व आवास गृहों का शिलान्यास 23 अगस्त 1986 में तत्कालीन राज्यमंत्री पीए संगमा ने किया था। कार्यक्रम की अध्यक्षता तत्कालीन श्रम एवं स्वास्थ्य मंत्री हीरालाल देवपुरा ने की थी। अस्पताल बनने के बाद समय के साथ यहां चिकित्सकों की संख्या व चिकित्सा सुविधाओं भी बेहतरी होती गई। लेकिन मुख्य अस्पताल से डिस्पेंसरी दूर है। (बोरानाडा, भदवासिया, बासनी द्वितीय फेज) ऐसे में यहां मरीज कम ही पहुंचते है जो आते है उनमें ही अधिकतर रेफरल मरीज होते है। अस्पताल में वर्तमान में रोजाना करीब 45-50 मरीज ही पहुंच रहे है।

तनख्वाह व रख-रखाव पर प्रतिमाह लाखों खर्च
अस्पताल में वर्तमान में 16 चिकित्सक, 18 नर्सिंग स्टॉफ, 10 चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी व चार एलडीएस कार्यरत है। जिनकी प्रतिमाह की तनख्वाह पर 62 लाख रुपए की राशि खर्च हो रही है। इसके साथ ही अस्पताल की सफाई पर प्रतिमाह 25 हजार, लाइट बिल 18 से 20 हजार व पानी बिल पर 16 हजार औसत खर्च हो रहा है। इसके साथ ही मरीजों को लाने ले जाने के लिए लगाई गई एम्बूलेंस पर प्रतिमाह 20 हजार खर्च हो रहे हैं।

रेडियोलोजिस्ट की कमी
50 बेड के इस अस्पताल में वर्तमान में 25 बेड रनिंग हैं। लेकिन रेडियोलोजिस्ट का पद लम्बे समय से रिक्त है ऐसे में यहां आने वाले मरीजों को सोनोग्राफी की सुविधा नहीं मिल पा रही है। तथा मरीजों की कमी के चलते कई मशीनें उपयोग में नहीं आने के कारण पड़ी-पड़ी धूंल फांक रही है।

इन्होंने कहा
अस्पताल का अभी आउटडोर 45-50 मरीज रोजाना का है। कोरोना के चलते अभी मरीज आना कम आ रहे हैं। मरीजों के कम आने का प्रमुख कारण डस्पेंसरी से दूरी व अन्य सरकारी अस्पतालों में भी निशुल्क दवाइयां मिलना भी है। वैसे अस्पताल में पर्याप्त चिकित्सक व चिकित्सा सुविधा हैं।
- डॉ एमएस कुरेशी, इएसआई अस्पताल अधीक्षक, जोधपुर

Published on:
28 Jul 2020 12:00 am