
जोधपुर.
मणिकारी व्यापारी की चार फर्मों पर आयकर सर्वे के बाद 1.11 करोड़ की आय सरेण्डर करने के बावजूद चार करोड़ रुपए का स्टॉक अधिक बताने का डर दिखाकर व्यापारी से सबसे पहले २५ लाख रुपए बतौर रिश्वत मांगे गए थे। फिर २४ लाख किए थे। मणिहारी व्यापारी सदाकत अली का कहना है कि आयकर विभाग के अधिकारियों ने बीस लाख रुपए उससे पहले ही वसूल कर लिए थे। इसके बाद पांच लाख रुपए और देने की मांग करने लगे थे। तब उसने सीबीआइ से शिकायत की थी।
नागौर में चूड़ीघर मोहल्ला निवासी सदाकत अली ने कहा कि बीस लाख रुपए लेने के बाद पांच लाख और मांगकर चार लाख रुपए लेना तय हुआ था। चूंकि शिकायत करने से पहले ही बीस लाख रुपए वो दे चुका था इसलिए उसने सीबीआइ को सिर्फ पांच लाख रुपए मांगने की ही लिखित शिकायत की थी। व्यापारी का कहना है कि इस मामले में अन्य अधिकारियों की भूमिका के संबंध में सीबीआइ जांच कर रही है।
सीबीआइ ने की आइटीओ मीणा से पूछताछ
व्यापारी से चार लाख रुपए रिश्वत लेने के मामले में सीबीआइ ने व्यापारी के सीए सुरेश पारीक, आयकर अधिकारी लक्ष्मण सिंह व आयकर निरीक्षक प्रेमसुख डिडेल पांच-पांच दिन के रिमाण्ड पर है। इनके सरकारी व निजी मकान के साथ ऑफिस में दबिश देकर जब्त दस्तावेजों की जांच की जा रही है। वहीं, प्रकरण में नामजद एक अन्य आयकर अधिकारी राजेन्द्र मीणा संदेह के दायरे में है। सीबीआइ ने पूछताछ के लिए मीणा को जोधपुर स्थित कार्यालय में शुक्रवार को तलब किया। रिश्वत के संबंध में मीणा से पूछताछ की गई और फिर उन्हें छोड़ा गया।