
अविनाश केवलिया/जोधपुर. हमारे शहर के आस-पास के कई गांवों में सब्जियां, गेहूं, या अन्य उत्पाद सीवरेज पानी से उगाए जाते हैं। यह पहचानना मुश्किल है कि जो उत्पाद आप घर ला रहे हैं वह किस पानी से उगाए गए हैं। हालांकि यह दावा है कि सीवरेज का यह ट्रीटेड पानी मानकों पर खरा उतरता है लेकिन चिकित्सकों का मानना है कि इस पानी की खेती के तत्काल प्रभाव नहीं दिखेंगे, लेकिन लम्बे समय तक उपभोग करने पर स्वास्थ्य प्रभावित हो सकता है।
सबसे पहले जोधपुर ने शुरुआत की
जोधपुर शहर में वर्तमान में करीब 90 एमएलडी पानी ट्रीट कर प्रतिदिन तीन एसटीपी से छोड़ा जा रहा है। इस ट्रीटेड पानी को बेच कर 40 लाख रुपए वार्षिक नगर निगम कमाता है। ट्रीटेड पानी को बेचने की शुरुआत सबसे पहले जोधपुर निगम ने की थी। अभी भी सफल तरीके से यह प्रक्रिया संचालित हो रही है। निगम आयुक्त सुरेश कुमार ओला ने बताया कि इस ट्रीटेड पानी का लगातार सैम्पल लिया जाता है। जिसे लैबोरेट्री खेती के अनुरूप बता रही है।
अभी इनकी हो रही खेती
इस ट्रीटेड पानी से वर्तमान में सालावास व आस-पास के गांवों में गेहूं, रायडा और ईसबगोल की खेती की हुई है। इसके अलावा अन्य सीजन में सब्जियां भी उगाई जाती है।
चिकित्सकीय व्यू
सीवरेज पानी में कैमिकल व बैक्टीरिया प्रदूषण का खतरा सबसे ज्यादा रहता है। महात्मा गांधी अस्पताल के फिजिशियन विनीत तिवारी ने बताया कि इस प्रकार के पानी से हो रही खेती से तत्काल कोई नुकसान नहीं दिखता। लेकिन इसका लम्बे समय तक उपभोग करने पर बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। पेट संबंधी बीमारियां, डाइजेशन, आंत के रोग का खतरा बढ़ जाता है।