
जोधपुर. संवित् साधनायन संस्थान आबू व शिवमठ शिवबाड़ी बीकानेर के अधिष्ठाता स्वामी संवित् सोमगिरि ने कहा कि जहां संत हो, वहीं वसंत है। वसंत की तरह ही संत विचरण करते हैं। दईजर लाछा बासनी स्थित संवित् धाम आश्रम में आशीर्वचन के दौरान स्वामी सोमगिरि ने कहा कि वसंत पंचमी एक महान वैदिक पर्व है जिसमें भगवती सरस्वती की पूजा अर्चना की जाती है। यह प्रकृति से जुड़ा हुआ पर्व भी है। वसंत पंचमी वाणी का पर्व है। सारी कलाएं, अपरा विद्या सरस्वती तत्व है। यौवन जीवन का वसंत है। सरस्वती रसमय है। कर्मयोग से ही जीवन में वसंत आ सकता है।
संस्थान के शेखर थानवी व महेश हर्ष ने बताया कि सभा के प्रारंभ में डॉ इन्द्रजीत छंगाणी, नटवर व्यास, सन्तोष व्यास, तरूण व्यास व राजेश कल्ला ने मंगलाचरण भजन प्रस्तुत किए। उपाध्यक्ष डा सीएस कल्ला, दिनेशचन्द्र सिंघल, ब्रजेश हर्ष, नेमाराम गहलोत, शशिबाला कल्ला, भैरूसिंह राजपुरोहित, गजेन्द्र बोहरा व गोपालसिंह खींची ने स्वामी सोमगिरि का स्वागत किया। संचालन संवित् साधनायन के सचिव भरत जोशी ने किया।