
अविनाश केवलिया. जोधपुर.
मानसून का आना कई मायनों में खुशहाली का प्रतीक है। चाहे किसानों के लिहाज से हो या पीने के पानी के हिसाब से। लेकिन शहर के प्रमुख जलाशयों के लिए मानसून लगभग बेअसर ही साबित होता है। इसका कारण है इनके कैचमेंट का पूरा पानी जलाशयों तक नहीं पहुंचना। मानसून में यदि बारिश अच्छी होती है तो मुश्किल से 30 से 40 एमसीफटी पानी हमारे शहर के तीन प्रमुख जलाशयों कायलाना, उम्मेद सागर व बालसमंद में आ सकता है।
इंदिरा गांधी लिफ्ट केनाल से पूरा पानी मिल रहा है तो फिर कटौती क्यों, इसी मुद्दे को लेकर अभी कुछ दिन पहले प्रभारी मंत्री लालचंद कटारिया ने निर्देश दिए थे। खास बात यह है कि केनाल से जो पानी मिल रहा है वह ग्रामीण क्षेत्र में खपत हो रहा है। ऐसे में प्रतिदिन कायलाना-तख्तसागर से एक से दो एमसीएफटी पानी का जलस्तर कम हो रहा है। वर्तमान में 200 एमसीएफटी से कम पानी है, जिसमें से भी उपयोग लेने लायक 60-65 एमसीएफटी ही है।
कायलाना पर केनाल की मेहरबानी
सिटी स्टोरेज सेंटर के रूप में कायलाना-तख्तसागर का उपयोग किया जाता है, लेकिन तेज गर्मी में पानी की खपत बढऩे के कारण हर साल जलस्तर नीचे गिरता रहता है। इस बार अब तक यही हाल बनी हुई है। मानसून की एंट्री हो चुकी है लेकिन कायलाना को भरने की जिम्मेदारी राजीव गांधी लिफ्ट केनाल की है। जैसे तापमान में कमी होगी केनाल का पानी कम उपयोग में होगा और कायलाना का जलस्तर बढ़ेगा।
यह है कैचमेंट का गणित
- 110 स्क्वायर किलोमीटर तीनों बड़े जलाशयों का कैचमेंट एरिया है।
- 90 किलोमीटर की नहरों से पानी आता था।
- 90 एमसीएफटी की बजाय 50 प्रतिशत पानी ही आ पाता है।
- 50 प्रतिशत कैचमेंट एरिया माइनिंग में आ गया।
एक्सपर्ट व्यू :: तो बच सकते हैं दो करोड़
माइनिंग के कारण कैचमेंट प्रभावित हुआ है। लेकिन कुछ सरल उपाय कर माइनिंग में अटके पानी को जलाशयों का तक लाया जात सकता है। करीब 50 प्रतिशत पानी माइनिंग के गड्ढों में भर जाता है इससे माइनिंग भी कुछ माह तक प्रभावित होती है। यदि उस पानी को लिफ्ट कर नहरों के जरिये जलाशयों में लाया जाए तो दो तरफा राहत मिल सकती है। केनाल के जरिये एक एमसीएफटी पानी लाने का खर्च करीब 4 लाख रुपए होता है। इस लिहाज से 50 एमसीएफटी पानी जो कि माइनिंग में रह जाता है वह 2 करोड़ कीमत का हुआ, जिसे बहुत ही कम खर्च पर लाया जा सकता है।
-महेश शर्मा, अधीक्षण अभियंता (सेवानिवृत्त), जलदाय विभाग