जोधपुर

एक ही दिन में ऐसा क्या हो गया कि रश्मि यादव को उठाना पड़ा यह खौफनाक कदम

-मेधावी छात्रा थी रश्मि यादव, फिर फंदे पर कैसे लटक गई -अब तक घटनाओं के बाद भी एम्स प्रशासन की चुप्पी
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Jul 27, 2018
Why Suicide MBBS Girls Student in Jodhpur AIIMS
एक ही दिन में ऐसा क्या हो गया कि रश्मि यादव को यह कदम उठाना पड़ा

जोधपुर.
पढ़ाई में शुरू से ही मेधावी रही अलवर की बेटी रश्मि को आखिरकर जोधपुर aiims में MBBS में प्रवेश लेने के दूसरे ही दिन ऐसा खौफनाक कदम क्यों उठाना पड़ा? यह सवाल न केवल रश्मि के परिजन, बल्कि मेडिकल की पढ़ाई करने वाले हजारों विद्यार्थियों की जेहन में भी उभर गया है। बताते हैं कि रश्मि अपने स्कूली समय से पढ़ाई में अव्वल रही थीं। कोटा व जयपुर में कोचिंग इस्टीट्यूट ऐलन के हर एग्जाम में टॉप-10 रैंकिंग में रहती थी। मेधावी रश्मि टॉप रैंकिंग के कारण कई मैडल जीत चुकी थी।

दो साल से बीकानेर के राजकीय महाविद्यालय में वैटनरी (पीवीटी) डिग्री कर रही थी। इस बीच ऑल इण्डिया कॉमन एंट्रेंस एग्जाम से 210 रैंक से एबीबीएस के लिए चयन हुआ। दूसरी वरियता से उसने जोधपुर एम्स का चयन किया था। 23 जुलाई को उसके परिजन जोधपुर एम्स में प्रवेश करवाकर गए थे। तब उसे यहां गल्र्स हॉस्टल में 114 नम्बर रूम आवंटित कर दिया गया। एम्स से जुड़े सूत्रों के अनुसार वह 24 व 25 जुलाई को भी सामान्य व खुश नजर आ रही थी। उसके पिता रामपाल यादव के अनुसार उनकी 25 जुलाई शाम को बात हुई, तब तक उसे जोधपुर एम्स में अच्छा लगना बताया। इसके बाद एक ही दिन में रश्मि के साथ ऐसा क्या हो गया कि वह गल्र्स छात्रावास में अपने ही कमरे मेें फंदे से लटकी पाई गई।


अधिकृत बयान से कतराते रहे अफसर-

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में एमबीबीएस प्रथम वर्ष में प्रवेश लेने के दो दिन के बाद ही छात्रा के फंदे पर लटकने की घटना को लेकर शुक्रवार को पूरे एम्स में हड़कम्प मचा रहा। घटना के रात से ही एम्स प्रशासन अपने अधिकृत पक्ष देने को लेकर बचाव करता रहा। शुक्रवार को भी एम्स उपनिदेश डॉ. एनआर विश्नोई, छात्रावास प्रभारी प्रो. विजयलक्ष्मी, स्टूडेंट वैल्फेयर डीन डॉ. सुरजीत घटक आदि अधिकारी कुछ भी कहने से कतराते रहे। छात्रावास प्रभारी प्रो. विजयलक्ष्मी इतना ही बोल पाई कि घटना से पूरे एम्स को शॉक लगा है।

देर शाम उपनिदेशक डॉ. एन.आर. विश्नोई ने पत्रिका को बताया कि छात्रा ने बंद कमरे में सुसाइड किया है। उसने ऐसा क्यों किया, यह पुलिस जांच से ही पता चलेगा। एम्स मेंं विद्यार्थियों की हेल्प के लिए काउंसलर, मेंटलमेंटी भी लगा रखे हैं। ओरियेंटेशन प्रोग्राम के अन्तर्गत भी विद्यार्थियों को तनाव रहित माहौल में सीखने व काम करना सीखाते हैं।


जोधपुर एम्स की साख पर सवाल-

जोधपुर एम्स के स्थापना के छह साल के सफर में ही अब तक तीन आत्महत्या की घटनाओं से एम्स की साख पर बट्टा लग रहा है। क्योंकि एक तरफ देशभर में दिल्ली एम्स के बाद जोधपुर एम्स विद्यार्थियों की दूसरी पसंद बन रहा है और दूसरी तरफ ऐसी घटनाएं होने से यहां की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े करता है। और दो आत्महत्या की घटनाएं तो नए बैच की शुरूआत यानि जुलाई माह में ही हुई है। सवाल यह उठ रहा है कि एम्स की कार्यप्रणाली में ऐसा क्या अलग है कि मेडिकल छात्र आते ही इतना खौफनाक कदम उठा लेते हैं।


मेरी बेटी के साथ गलत हुआ- (रश्मि के पिता)

रश्मि के पिता रामनिवास यादव ने आरोप लगाया कि उसकी बेटी शुरू से ही पढ़ाई में मेधावी रही है। 25 जुलाई की रात 9 बजे भी उनकी बात बेटी से हुई थी। उन्होंने कहा कि मेरी बेटी हिम्मतवाली थी। ऐसा कदम कभी नहीं उठा सकती। उसके साथ गलत हुआ होगा। इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।


परिजन का यह भी आरोप-

-उनकी पुत्री रश्मि के साथ घटना शाम छह बजे ही हो गई, लेकिन उन्हें सूचना रात साढ़े 9 बजे दी गई। पुलिस को सूचना भी उनको बताने के एक घंटे बाद साढ़े दस बजे दी गई।
-पुलिस की मौजूदगी के बिना शव को नीचे उतार दिया गया। पुलिस को कमरे में नहीं बुलाया गया।

-रश्मि के गले में चोट व खून के निशान है, इसलिए उसके साथ कुछ गलत हुआ है।

- 7 जुलाई 2015 : जयपुर के फुलेरा निवासी एमबीबीएस छात्र गजेन्द्रसिंह (19) ने हॉस्टल रूम में फांसी लगाकर जान दे दी थी। तब गजेन्द्रसिंह ने मेडिकल फील्ड से मुक्ति पाने के लिए सुसाइड करना लिखा था।
- 16 दिसम्बर 2017 : एम्स हॉस्टल में बाड़मेर जिले के बायतु निवासी एमबीबीएस के तृतीय सेमेस्टर के छात्र पाबूलाल (21) ने बालकॉनी से लटककर जान दे दी थी।

Published on:
27 Jul 2018 09:32 pm