जोधपुर

वन्यजीवों पर कहर बन कर टूटा कोरोना लॉकडाउन, इस अवधि में 350 वन्यजीवों को श्वानों ने किया घायल

कायलाना रोड पर स्थित संभाग के एकमात्र वन्यजीव चिकित्सालय में लॉकडाउन अवधि के दौरान 350 से अधिक घायल वन्यजीवों को लाया जा चुका है। इनमें श्वानों के हमलों में घायल वन्यजीवों की संख्या सर्वाधिक है।
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wild animals injured due to dogs attack in rural areas of jodhpur
वन्यजीवों पर कहर बन कर टूटा कोरोना लॉकडाउन, इस अवधि में 350 वन्यजीवों को श्वानों ने किया घायल

नंदकिशोर सारस्वत/जोधपुर. कायलाना रोड पर स्थित संभाग के एकमात्र वन्यजीव चिकित्सालय में लॉकडाउन अवधि के दौरान 350 से अधिक घायल वन्यजीवों को लाया जा चुका है। इनमें श्वानों के हमलों में घायल वन्यजीवों की संख्या सर्वाधिक है। वनविभाग के आंकड़ों के अनुसार मार्च में 114, अप्रेल में 110, मई में 109 घायलों को वन्यजीव चिकित्सालय लाया गया। इसके अलावा जिले के खेजड़ली रेस्क्यू सेंटर और अन्य जगहों पर श्वानों के हमलों में मारे गए वन्यजीवों की संख्या 200 से अधिक है।

अकेले जून माह के प्रथम सप्ताह में वन्यजीव चिकित्सालय लाए गए घायल वन्यजीवों का आंकड़ा 50 तक जा पहुंच चुका है। गंभीर घायलों में चिंकारे, ब्लेक बक, रोजड़े, मोर, चील शामिल हैं। चिकित्सा सहयोगी महेन्द्र गहलोत ने बताया कि जिले के वन्यजीव बहुल क्षेत्रों में श्वानों के हमलों से घायल वन्यजीवों की जीवितता दर मात्र 35 प्रतिशत है। घायल वन्यजीवों को चिकित्सालय तक सुरक्षित लाने के दौरान भी शॉक से मौत की दर ज्यादा है। कोरोना लॉकडाउन में सरकार की ओर से मिली राहत भी वन्यजीवों की जान के लिए जानलेवा साबित होने लगी है।

स्थाई चिकित्सक की व्यवस्था नहीं
संभाग के एकमात्र वन्यजीव चिकित्सालय में सेवारत डॉ. श्रवणसिंह को गोडावण परियोजना में जैसलमेर भेज दिए जाने के बाद चिकित्सालय में स्थाई चिकित्सक नहीं होने से परेशानियां बढ़ रही हैं। बारिश के दिनों में घायल वन्यजीवों की संख्या बढऩे की स्थिति में कम से कम दो स्थाई पशु चिकित्सकों की जरूरत है। यदि वर्तमान हालात रहे तो बारिश के दिनों में बड़ी संख्या में वन्यजीवों की मौत हो सकती है।

Published on:
09 Jun 2020 11:55 am