जोधपुर

सरकार से नहीं मिली मदद तो भामाशाहों के सहयोग से बना दिया वन्यजीव रेस्क्यू सेंटर

समूचे विश्व को पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने वाले खेजड़ली में चंदे से संचालित हो रहा वन्यजीव चिकित्सालय
2 min read
Oct 12, 2020
सरकार से नहीं मिली मदद तो भामाशाहों के सहयोग से बना दिया वन्यजीव रेस्क्यू सेंटर
जोधपुर से 28 किलोमीटर दूर खेजड़ली गांव में भामाशाह के सहयोग से संचालित वन्य जीव रेस्क्यू सेंटर


नंदकिशोर सारस्वत

जोधपुर. पेड़ों की रक्षा के लिए 290 साल पहले अपने प्राणोत्सर्ग करने वाले 363 शहीदों की बलिदान स्थली खेजड़ली में घायल वन्यजीवों के उपचार के लिए लंबे अर्से से सरकार के उपेक्षापूर्ण रवैये के कारण क्षेत्र के कुछ पर्यावरण प्रेमी भामाशाहों के सहयोग खुद ही एक वन्यजीव चिकित्सालय का संचालन कर रहे है। वर्तमान में 27 घायल कृष्ण मृग, चिंकारे, 13 जंगली खरगोश, 8 नीलगाय, आधा दर्जन मोर सहित कुल 54 घायल वन्यजीवों की देखभाल की जा रही है।

न दवाइयां न रेस्क्यू करने वाहन फिर भी नहीं हारी हिम्मत
क्षेत्र के पर्यावरणप्रेमी घेवरराम गोदारा कुछ सहयोगियों के साथ पिछले 20 माह से 24 घंटे निस्वार्थ भाव से वन्यजीवों की सेवा में जुटे है। पत्रिका से बातचीत में गोदारा ने बताया की वन्यजीवों की चिकित्सा के लिए उनके पास पूरी दवाइयां नहीं है। गंभीर घायल वन्यजीवों के उपचार के लिए पास के ही सरकारी हॉस्पिटल से चिकित्सक को बुलाना पड़ता है। आसपास के क्षेत्र में घायल वन्यजीवों की सूचना मिलने पर क्षेत्र के सहयोगी शंकरदास का निजी वाहन प्रयुक्त करते है। लॉकडाउन अवधि में भामाशाहों के सहयोग से पानी की खेळी बनाई गई है। रेस्क्यू सेंटर में रामस्वरूप, श्याम सुंदर गोदारा, सचिन खावा हमेशा घायलों की सेवा को तैयार रहते है। बिश्नोई टाईगर्स वन्य एवं पर्यावरण संस्था के प्रदेश अध्यक्ष रामपाल भवाद ने बताया की सरकारी बजट के अभाव में भामाशाहों के सहयोग से संचालित अकेला खेजड़ली वन्यजीव रेस्क्यू सेंटर ही नहीं बल्कि खुद वनविभाग का संभाग स्तरीय वन्यजीव चिकित्सालय भी कई सालों से संसाधनों के अभाव में है। सरकार को जिले के सभी घायल वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए विशेष बजट जारी कर हर ग्राम पंचायत मुख्यालय पर वन्यजीव रेस्क्यू वार्ड, पशु चिकित्सक तथा वन्यजीव बहुल क्षेत्रों में हिंसक श्वानों पर नियंत्रण करने के लिए शेल्टर हाउस निर्माण करना होगा। इनके संचालन की जिम्मेदारी भी क्षेत्र के सरपंचों को सौंपी जानी चाहिए।

Published on:
12 Oct 2020 04:51 pm