
जोधपुर.
आग का गोला बनी स्लीपर बस में जोधपुर के प्रतापनगर बिजलीघर के पीछे रहने वाला प्रदीप पुत्र सूरजमल, उसकी पत्नी पूजा और छह माह की पुत्री पीहू भी सवार थे। प्रदीप के साढ़ू के बच्चे का निधन हो गया था। दाह संस्कार के लिए तीनों बालोतरा गए थे, जहां घर लौटने के लिए सुबह दस बजे स्लीपर बस में सवार हुए थे, लेकिन बीस मिनट बाद ही हादसा हो गया।
प्रदीप के मामा सुभाष का कहना है कि प्रदीप अपनी पत्नी व पुत्री के साथ घर लौट रहा था। आग लगने के दौरान बस के कांच बंद थे। जैसे ही आग लगी तो आस-पास के लोग बचाव के लिए आए। प्रदीप अपनी पुत्री व पत्नी को लेकर बस में पीछे की तरफ चला गया था। कांच नहीं खुला तो बाहर से किसी ने पत्थर फेंककर कांच फोड़ा। यह पत्थर व कांच प्रदीप के सिर पर लगा। जिससे उसके खून बहने लगा। इसके बावजूद उसने पुत्री को गोद में उठाया और दोनों कांच से नीचे कूद गए। जिससे उसका एक पांव फ्रैक्चर हो गया। मासूम पुत्री के मामूली चोट आई। खुद की परवाह किए बगैर उसने अपनी पत्नी को सकुशल बाहर निकालने की कोशिश शुरू की। काफी मशक्कत के बाद पत्नी पूजा को भी बाहर निकाल लिया गया, लेकिन तब तक उसके हाथ व पांव झुलस चुके थे। बालोतरा के नाहटा अस्पताल से तीनों को महात्मा गांधी अस्पताल रैफर किया गया, जहां जांच के बाद चिकित्सकों ने तीनों की हालत खतरे से बाहर बताई।