
Naxalite Surrender: कांकेर जिले में नक्सलियों के आत्मसमर्पण का सिलसिला लगातार जारी है और इसमें कमी आने के बजाय अब और तेजी देखने को मिल रही है। हाल ही में पापा राव के समर्पण के बाद एक बार फिर बड़ी सफलता की खबर सामने आई है। जिले के उइकाटोला के घने जंगलों से 5 सशस्त्र नक्सली मुख्यधारा में लौटने के लिए आगे आए हैं, जो पुलिस के सामने आत्मसमर्पण करने के लिए निकले हैं।
जानकारी के अनुसार, ये सभी नक्सली कांकेर एसपी कार्यालय पहुंचकर औपचारिक रूप से सरेंडर करेंगे। आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों के पास एक SLR और दो .303 रायफल जैसे हथियार भी मौजूद हैं, जिन्हें वे पुलिस के हवाले करेंगे। समर्पण करने वाले नक्सलियों में एरिया कमेटी सदस्य (ACM) स्तर के कई सक्रिय कैडर शामिल हैं, जिनमें मंगेश, गणेश उइका, राजे, हिड़मे उर्फ जमाली और मंगति के नाम प्रमुख हैं।
ये सभी लंबे समय से नक्सली गतिविधियों में शामिल रहे हैं और इलाके में सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं। इन पांचों नक्सलियों के आत्मसमर्पण को सुरक्षा बलों के लिए बड़ी कामयाबी माना जा रहा है। इसके साथ ही यह भी माना जा रहा है कि कांकेर जिले के मोहला-अवंधी संयुक्त एरिया कमेटी पर इसका सीधा असर पड़ेगा और यह क्षेत्र काफी हद तक नक्सल प्रभाव से मुक्त हो सकेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार चलाए जा रहे ऑपरेशन, बढ़ता सुरक्षा दबाव और सरकार की पुनर्वास नीति के कारण नक्सलियों में आत्मसमर्पण की प्रवृत्ति बढ़ रही है। प्रशासन भी ऐसे नक्सलियों को मुख्यधारा में लाने के लिए प्रोत्साहन योजनाएं चला रहा है, जिससे वे सामान्य जीवन की ओर लौट सकें। यह घटनाक्रम संकेत देता है कि क्षेत्र में सुरक्षा बलों की रणनीति असर दिखा रही है और आने वाले समय में नक्सल प्रभावित इलाकों में शांति और विकास की संभावनाएं और मजबूत हो सकती हैं।
मुख्यमंत्री: राज्य सरकार की पारदर्शी, संवेदनशील और पुनर्वास केंद्रित नीतियों के कारण भटके हुए युवा अब मुख्यधारा में लौटने का विश्वास पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह आत्मसमर्पण इस बात का प्रमाण है कि यदि सही अवसर, सुरक्षा और सम्मानजनक जीवन का भरोसा मिले, तो हिंसा का रास्ता छोड़कर विकास के मार्ग को अपनाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि आज बस्तर में बंदूक की आवाज़ नहीं, बल्कि विकास, विश्वास और नई उम्मीदों की गूंज सुनाई दे रही है। सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के क्षेत्र में तेजी से हो रहे कार्यों ने बस्तर के जनजीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाया है।