
Raipur News: अस्पताल में केवल दो किलोग्राम वजन वाले नवजात की सफल हार्ट सर्जरी की गई। पीडियाट्रिक कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. अनिल चौहान के अनुसार यह बेहद चुनौतीपूर्ण सर्जरी है। दरअसल इतने कम वजन वाले नवजात के अंग पूरी तरह विकसित नहीं होते। ऐसे में ब्लड वॉल्यूम, फ्लूइड बैलेंस व ब्लड प्रेशर को सर्जरी के दौरान और बाद में नियंत्रित रखना बहुत कठिन होता है।
उन्होंने बताया कि थोड़ी सी भी अस्थिरता बच्चे के किडनी, फेफड़ों व मस्तिष्क पर गंभीर प्रभाव डाल सकती है। ऐसे नवजात में हार्ट सर्जरी करना पीडियाट्रिक मेडिसिन के सबसे जटिल व संवेदनशील कार्यों में से एक माना जाता है। डॉ. चौहान ने बताया कि ऐसे मामलों में क्या तुरंत सर्जरी की जाए या बच्चे के थोड़ा बड़ा होने का इंतजार किया जाए, यह देखना होता है। लेकिन यदि ऑपरेशन में देरी की जाती तो बच्चे की किडनी की कार्यक्षमता और हार्ट की स्थिति और बिगड़ सकती थी।
इससे आगे चलकर हार्ट फेलियर का खतरा बढ़ सकता था। अस्पताल की नियानेटोलॉजिस्ट डॉ. अर्चना राय ने बताया कि कोआक्र्टेशन ऑफ एओर्टा की सर्जरी के बाद नवजात शिशुओं का नियमित फॉलो-अप जरूरी है। हालांकि ऐसे मामलों में सर्वाइवल रेट लगभग 95-98% होता है। फिर भी लंबे समय में कुछ जटिलताओं की संभावना बनी रहती है।
फॉलोअप के दौरान डॉक्टर विशेष रूप से री-कोआक्र्टेशन (एओर्टा का दोबारा संकरा होना), हाई ब्लड प्रेशर और एओर्टिक वाल्व से जुड़ी समस्याओं की निगरानी करते हैं। इसके लिए नियमित क्लीनिकल जांच और इकोकार्डियोग्राफी की जाती है ताकि हार्ट की कार्यप्रणाली सामान्य बनी रहे। इसके अलावा न्यूरो-डेवलपमेंटल फॉलो-अप भी बेहद जरूरी होता है। इसमें बच्चे के मस्तिष्क विकास, मोटर स्किल्स, बोलने-समझने की क्षमता और समग्र विकास की नियमित निगरानी की जाती है।
Published on:
11 Mar 2026 01:04 pm
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