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Rowghat Railway Project: कांकेर में रावघाट रेल प्रोजेक्ट का अंतिम ट्रायल पूरा, पूर्व नक्सलियों ने पहली बार ट्रेन में किया सफर

Chhattisgarh Rail Project: कांकेर में रावघाट रेल परियोजना का अंतिम ट्रायल सफल रहा। वहीं भानुप्रतापपुर में आत्मसमर्पित पूर्व नक्सलियों ने पहली बार रेल यात्रा कर बदलते बस्तर और विकास की नई कहानी को सामने रखा।

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Rowghat Railway Project

रावघाट रेल प्रोजेक्ट (photo source- Patrika)

Rowghat Railway Project: कांकेर जिले से आज दो ऐसी तस्वीरें सामने आईं, जो बदलते बस्तर की नई कहानी बयां कर रही हैं। एक ओर 21 साल के लंबे इंतजार के बाद रावघाट रेल परियोजना अपने अंतिम पड़ाव तक पहुंची, तो दूसरी ओर कभी विकास परियोजनाओं का विरोध करने वाले आत्मसमर्पित पूर्व नक्सली पहली बार ट्रेन में सफर करते नजर आए। ये सिर्फ दो घटनाएं नहीं, बल्कि बस्तर में बदलते माहौल, बढ़ते विश्वास और विकास की नई दिशा का संकेत हैं—जहां अब बंदूक की जगह विकास की पटरी पर भविष्य दौड़ता दिखाई दे रहा है।

Rowghat Railway Project: भानुप्रतापपुर में बदलाव की झलक

दूसरी तस्वीर भानुप्रतापपुर से सामने आई, जहां आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटे पूर्व नक्सलियों को पुलिस ने रेल यात्रा कराई। यह वही लोग हैं जो कभी रेल परियोजनाओं का विरोध करते थे, लेकिन आज उसी विकास का हिस्सा बनकर ट्रेन में सफर करते नजर आए। सफर के दौरान उनके चेहरों पर खुशी और उत्साह साफ देखा गया। यह दृश्य बस्तर में बदलते हालात और विश्वास की नई शुरुआत को दर्शाता है।

विकास और बदलाव की नई कहानी

कभी नक्सली गतिविधियों के कारण जहां रेल सेवाएं प्रभावित होती थीं, वहीं आज वही क्षेत्र विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है। जगदलपुर-बैलाडीला रेल मार्ग जैसे क्षेत्रों में पहले नक्सली घटनाएं बड़ी चुनौती थीं, लेकिन अब हालात बदलते नजर आ रहे हैं।

बदलते बस्तर का संदेश

कांकेर से आई ये दोनों तस्वीरें सिर्फ एक खबर नहीं, बल्कि बदलते बस्तर की कहानी हैं—जहां एक तरफ 21 साल का इंतजार पूरा होने की खुशी है, तो दूसरी तरफ हिंसा छोड़कर मुख्यधारा में लौटने का संदेश। अब साफ है कि बस्तर में बंदूक की आवाज से ज्यादा विकास की पटरी की गूंज सुनाई देने लगी है।

Rowghat Railway Project: छत्तीसगढ़ की सबसे महत्वपूर्ण रेल परियोजना

रावघाट रेल परियोजना छत्तीसगढ़ की सबसे महत्वपूर्ण और लंबे समय से लंबित परियोजनाओं में से एक रही है। इस परियोजना की शुरुआत वर्ष 2007 के आसपास हुई थी, जिसका उद्देश्य बस्तर क्षेत्र को रेल नेटवर्क से बेहतर तरीके से जोड़ना और रावघाट क्षेत्र में मौजूद खनिज संसाधनों तक पहुंच आसान बनाना था।

हालांकि, नक्सल प्रभावित इलाका होने के कारण यह परियोजना लगातार सुरक्षा चुनौतियों और हमलों से प्रभावित होती रही, जिससे काम में कई बार रुकावट आई। करीब 21 साल के लंबे इंतजार और संघर्ष के बाद अब यह परियोजना अपने अंतिम चरण तक पहुंच गई है। इसी के साथ भानुप्रतापपुर में आत्मसमर्पित पूर्व नक्सलियों की पहली रेल यात्रा ने यह संदेश भी दिया है कि बस्तर अब हिंसा से विकास और मुख्यधारा की ओर तेजी से बढ़ रहा है।