
कोयलीबेड़ा में गर्मी का कहर (photo source- Patrika)
Chhattisgarh Heatwave: कोयलीबेड़ा क्षेत्र में लगातार बढ़ती भीषण गर्मी अब जनजीवन के साथ-साथ पर्यावरण और जलजीवों के लिए भी गंभीर संकट बन गई है। मंगलवार को इलाके का तापमान रिकॉर्ड 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जिससे पूरा क्षेत्र तपती भट्टी में तब्दील हो गया। तेज धूप, झुलसाने वाली हवाओं और उमस ने लोगों का घरों से बाहर निकलना मुश्किल कर दिया है। इस भीषण गर्मी का सबसे भयावह असर अब स्थानीय जलस्रोतों में दिखाई दे रहा है, जहां अत्यधिक तापमान के कारण तालाब में बड़ी संख्या में मछलियों की मौत हो गई है।
मंगलवार सुबह से ही कोयलीबेड़ा क्षेत्र में तेज धूप और गर्म हवाओं का असर साफ देखा गया। दोपहर होते-होते तापमान 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जिससे सड़कों पर सन्नाटा पसरा रहा। लोग जरूरी काम होने पर ही घरों से बाहर निकल रहे हैं। बाजारों में भी सामान्य दिनों की तुलना में काफी कम भीड़ देखने को मिली।
भीषण गर्मी का सबसे ज्यादा असर कोयलीबेड़ा के मुख्य पंचायत तालाब पर पड़ा, जहां पानी का तापमान बढ़ने से बड़ी संख्या में मछलियां अचानक मर गईं। तालाब में मृत मछलियों के तैरने की खबर फैलते ही पूरे इलाके में हड़कंप मच गया। स्थानीय लोगों के अनुसार, तालाब में कई क्विंटल मछलियां मृत अवस्था में पाई गईं।
विशेषज्ञों के अनुसार, लगातार बढ़ती गर्मी के कारण तालाब का जलस्तर तेजी से घटा है और पानी अत्यधिक गर्म हो गया है। इससे पानी में घुलित ऑक्सीजन (Dissolved Oxygen) की मात्रा कम हो गई, जिसके चलते मछलियां जीवित नहीं रह सकीं। गर्मी के कारण जलजीवों पर पड़ने वाले प्रभाव का यह बड़ा उदाहरण माना जा रहा है।
इस घटना से स्थानीय मछली पालन से जुड़े लोगों को बड़ा आर्थिक झटका लगा है। जिन ग्रामीणों की आजीविका मछली पालन पर निर्भर थी, उनके सामने अब रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। प्रभावित लोगों ने प्रशासन से नुकसान का सर्वे कर मुआवजा देने की मांग की है।
तालाब किनारे और पानी में पड़ी मृत मछलियों के सड़ने से आसपास के रिहायशी इलाकों में भीषण दुर्गंध फैल गई है। ग्रामीणों का कहना है कि दुर्गंध के कारण सांस लेने में परेशानी हो रही है और बीमारी फैलने का खतरा भी बढ़ गया है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि तालाब की तत्काल सफाई कर मृत मछलियों को हटाया जाए, ताकि दुर्गंध और संक्रमण के खतरे को रोका जा सके। लोगों का कहना है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो हालात और गंभीर हो सकते हैं।
IMD ने आने वाले दिनों में भी क्षेत्र में लू चलने और तापमान अधिक रहने की संभावना जताई है। प्रशासन ने लोगों को दोपहर के समय अनावश्यक रूप से बाहर न निकलने, पर्याप्त पानी पीने और गर्मी से बचाव के उपाय अपनाने की सलाह दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ता तापमान केवल इंसानों के लिए नहीं, बल्कि जलस्रोतों, वन्यजीवों और पूरे पारिस्थितिकी तंत्र के लिए खतरे की घंटी है। कोयलीबेड़ा की यह घटना जलवायु परिवर्तन के बढ़ते असर की गंभीर चेतावनी मानी जा रही है।
Published on:
20 May 2026 11:47 am
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