कांकेर

डॉक्टर की लापरवाही या सिस्टम फेल? इलाज नहीं मिलने से मां और नवजात की मौत, कांकेर में मचा हड़कंप

Kanker Hospital Negligence: कांकेर जिले के भानुप्रतापपुर से स्वास्थ्य व्यवस्था को शर्मसार कर देने वाला मामला सामने आया है। यहां इलाज नहीं मिलने और डॉक्टरों की कथित लापरवाही के चलते एक आदिवासी प्रसूता और उसके नवजात की मौत हो गई।

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May 22, 2026
मां और नवजात की मौत (फोटो सोर्स- iStock)

Mother and Newborn Death Case: कांकेर जिले के भानुप्रतापपुर से स्वास्थ्य व्यवस्था को शर्मसार कर देने वाला दर्दनाक मामला सामने आया है। यहां एक आदिवासी प्रसूता और उसके नवजात बच्चे की मौत ने सरकारी अस्पतालों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल में समय पर इलाज और डॉक्टरों की मौजूदगी नहीं मिलने के कारण मां और बच्चे दोनों की जान चली गई। घटना के बाद इलाके में भारी आक्रोश का माहौल है।

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Government Hospital Negligence: 15 मई को अस्पताल में कराया था भर्ती

जानकारी के मुताबिक, ग्राम चाहचाड निवासी कमलेश कोमरा अपनी गर्भवती पत्नी द्रोपदी कोमरा को प्रसव पीड़ा होने पर 15 मई को भानुप्रतापपुर अस्पताल लेकर पहुंचे थे। परिजनों का कहना है कि अस्पताल में भर्ती करने के बाद भी महिला की हालत पर गंभीरता से ध्यान नहीं दिया गया। प्रसूता लगातार दर्द से कराहती रही, लेकिन डॉक्टरों की ओर से उचित इलाज नहीं मिला।

सोनोग्राफी मशीन खराब, बाइक से ले जाना पड़ा निजी अस्पताल

परिजनों के अनुसार, 17 मई को अस्पताल स्टाफ ने सोनोग्राफी कराने की सलाह दी। लेकिन अस्पताल की सोनोग्राफी मशीन पिछले एक साल से खराब पड़ी थी। ऐसे में मजबूर पति अपनी गर्भवती पत्नी को बाइक पर बैठाकर निजी अस्पताल ले गया, जहां सोनोग्राफी कराई गई।

ऑन-कॉल डॉक्टर पर लगाए गंभीर आरोप

रिपोर्ट लेकर वापस अस्पताल पहुंचने के बाद भी महिला को इलाज नहीं मिला। परिजनों का आरोप है कि ऑन-कॉल डॉक्टर को कई बार फोन किया गया, लेकिन डॉक्टर अस्पताल नहीं पहुंचे। इस दौरान महिला की हालत लगातार बिगड़ती चली गई।

निजी अस्पताल में हुआ प्रसव, नहीं बच सकी मां और नवजात

महिला की गंभीर स्थिति को देखते हुए परिजन उसे निजी अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां देर रात प्रसव कराया गया। लेकिन गर्भ में संक्रमण फैल जाने के कारण नवजात बच्चे ने जन्म के एक घंटे बाद दम तोड़ दिया। वहीं कुछ घंटों बाद प्रसूता द्रोपदी की भी मौत हो गई।

अगर समय पर इलाज मिलता तो बेटी जिंदा होती

मृतिका की मां ने अस्पताल प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि वे डॉक्टरों को भगवान मानते थे, लेकिन उनकी बेटी की पीड़ा किसी ने नहीं सुनी। उन्होंने कहा कि अगर समय पर इलाज मिल जाता, तो उनकी बेटी और नवजात आज जिंदा होते।

पति बोला- बेहतर इलाज की उम्मीद में लाए थे अस्पताल

मृतिका के पति कमलेश ने बताया कि दुर्गुकोंदल में हुई जांच रिपोर्ट सामान्य थी। बेहतर इलाज की उम्मीद में वे भानुप्रतापपुर अस्पताल पहुंचे थे, लेकिन यहां की लापरवाही ने उनका परिवार उजाड़ दिया।

BMO ने दी सफाई, कार्रवाई की मांग तेज

इधर मामले में BMO डॉ. गोटा का कहना है कि प्रसूता की शुरुआती रिपोर्ट सामान्य थीं और अस्पताल की ओर से बेहतर इलाज देने का प्रयास किया गया। हालांकि घटना के बाद क्षेत्र में लोगों का गुस्सा बढ़ गया है और दोषी डॉक्टरों व कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की जा रही है।

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Published on:
22 May 2026 01:50 pm
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