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MBBS Seats: कांकेर मेडिकल कॉलेज के छात्रों ने सबसे ज्यादा बदली एमबीबीएस सीटें, ये रही वजह…

MBBS Seats: कांकेर मेडिकल कॉलेज चालू हुए 3 साल पूरा हो गया है। यह कॉलेज 2021 में शुरू हुआ था। कॉलेज में फैकल्टी की भारी कमी है। पहले साल जब फर्स्ट ईयर की परीक्षा हुई तो एनाटॉमी में एक ही फैकल्टी थी।

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Sep 29, 2024

MBBS Seats: मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश के लिए दूसरे राउंड की आवंटन सूची जारी की जा चुकी है। इस सूची में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। जैसे कांकेर मेडिकल कॉलेज में पहले राउंड में प्रवेश लेने वाले सबसे ज्यादा छात्रों ने सीटें अपग्रेड करवाई हैं। पहले राउंड के बाद वहां स्टेट कोटे की महज 3 सीटें खाली थीं। दूसरे राउंड में वहां 58 सीटों का आवंटन किया गया है।

MBBS Seats: 55 छात्रों ने करवाई सीटें अपग्रेड

इसका मतलब ये है कि 55 छात्रों ने सीटें अपग्रेड करवाई हैं। नेहरू मेडिकल कॉलेज में केवल 4 छात्रों ने सीटें छोड़ी थीं, क्योंकि इन छात्रों का एडमिशन आल इंडिया कोटे से हो गया था। वहां 34 सीटें खाली थीं, जिस पर सभी सीटों पर आवंटन कर दिया गया है।

कांकेर मेडिकल कॉलेज चालू हुए 3 साल पूरा हो गया है। यह कॉलेज 2021 में शुरू हुआ था। कॉलेज में फैकल्टी की भारी कमी है। पहले साल जब फर्स्ट ईयर की परीक्षा हुई तो एनाटॉमी में एक ही फैकल्टी थी। ये एमएससी है न कि एमडी। सेकंड ईयर में पैथोलॉजी का कोई भी टीचर नहीं था। इसके बावजूद रिजल्ट 97 से 99 फीसदी तक आया है।

छात्रों को कॉलेज आने जाने में होती है परेशानी

दुर्ग में 8 सीटें खाली थीं, लेकिन वहां 50 सीटों का आवंटन किया गया है। सीटें अपग्रेड करवाने वालों में दुर्ग का सरकारी कॉलेज दूसरे नंबर पर है। वहां भी फैकल्टी की कमी है। यही नहीं कॉलेज बिल्डिंग जहां है, वह मेन रोड से डेढ़ से दो किमी अंदर है। रास्ता कच्चा है और बारिश में कीचड़ है।

स्ट्रीट लाइट भी नहीं है, जिसके कारण छात्रों को कॉलेज आने-जाने में परेशानी होती है। सिस में 5 सीटें खाली थीं, लेकिन 45 सीटों का आवंटन किया गया। इनमें भी कुछ छात्रों का प्रवेश आल इंडिया कोटे से होने के बाद सीटें छोड़ दी। कुछ अपग्रेड करवाकर नेहरू मेडिकल कॉलेज रायपुर पहुंच गए।

कॉलेज में प्रवेश के लिए अच्छी रैंक के साथ नीट स्कोर भी जरूरी

MBBS Seats: मेडिकल कॉलेज चाहे वह सरकारी हो या निजी, सीटें खाली नहीं रहेंगी। वर्तमान में एमबीबीएस कोर्स का जो क्रेज है, इस ट्रेंड को देखकर तो यही लगता है। हालांकि छात्रों को सुविधा भी चाहिए। उदाहरण के लिए रहने के लिए हॉस्टल, जाने के लिए बढ़िया सड़क, कॉलेज का बढ़िया माहौल, पर्याप्त फैकल्टी व बढ़िया लाइब्रेरी।

छात्रों की ये पहली प्राथमिकता होती है। इसके बाद ये भी सुविधा न हो तो छात्र प्रवेश ही ले लेते है। दरअसल, एमबीबीएस की डिग्री कहीं से भी मिले, मान्य है। कांकेर में फिलहाल होस्टल कहां रहेगा, यही तय नहीं है।

डॉ. यूएस पैकरा, डीएमई ने पत्रिका को बताया कि इसमें कोई दो राय नहीं कि छात्र या पालक, ऐसे मेडिकल कॉलेज ढूंढ़ते हैं, जहां सभी फेसिलिटी हो। MBBS Seats हालांकि बढ़िया कॉलेज में प्रवेश के लिए अच्छी रैंक के साथ नीट स्कोर भी जरूरी है। प्रदेश के सभी सरकारी मेडिकल कॉलेज अच्छे हैं। एनएमसी ने सभी को मापदंड में खरा पाकर मान्यता दी है।

Updated on:
30 Sept 2024 01:32 pm
Published on:
29 Sept 2024 10:49 am
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