अटल बिहारी वाजपेयी जी के जुझारू व्यक्तित्व का हर कोई लोहा मानता है...
कन्नौज. पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी का शरीर जरूर पंचतत्व में विलीन हो गया लेकिन उनकी यादें अब लोगों के मन में गूंज रही हैं। कन्नौज वासियों ने उनको द्रवित आंखों से अंतिम विदाई दी। वैसे कन्नौज शहर से भी उनका गहरा नाता रहा है। उन्होंने सबसे पहले 1956 में जनसंघ के कार्यकर्ता के तौर पर यहां पर कदम रखा था। तब कन्नौज फर्रुखाबाद का एक अंग हुआ करता था। वह जनसंघ के बड़े नेता राम प्रकाश त्रिपाठी, जो कि बाद में उत्तर प्रदेश सरकार में सहकारिता मंत्री भी रहे, उनके साथ यहां आए थे।
जमीदारी उन्मूलन की बने आवाज
इसके बाद 1957 में जमीदारी उन्मूलन को लेकर आवाज उठाने अटल जी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी गोवर्धन लाला कनौजिया के साथ तिर्वा रोड स्थित देवा बाजार पहुंचे। किसानों के साथ उन्होंने बैठक की और फिर प्रदर्शन किया था। वरिष्ठ भाजपा नेता प्रमोद दुबे बताते हैं कि जिले के वयोवृद्ध नेता कालीचरण टंडन अक्सर अटल जी के किस्से सुनाया करते थे। वह बताते थे कि आजादी के बाद जमींदारी उन्मूलन के लिए जोरशोर से आवाज उठना शुरू हो गई थी। आंदोलन पूरे जोर पर था, तभी 1957 में तिर्वा रोड स्थित देवा बाजार में वह किसानों की आवाज उठाने पहुंचे। उन्होंने तब तक लड़ाई लड़ने का संकल्प लिया, जब तक वह दूर न हो जाए। अटल जी के इसी जुझारू व्यक्तित्व का हर कोई लोहा मानता था।
छात्रों को बताया था देश का भविष्य
कन्नौज की धरा का यह सौभाग्य था जब सन 1979 में विदेश मंत्री रहते हुए अटल जी पीएसएम डिग्री कालेज आए थे। पीएसएम तब भी छात्र राजनीति का केंद्र था। तब वह पीएसएम डिग्री कालेज के संस्थापक डॉ. हरिस्वरूप दुबे के बुलावे पर आये थे। वह छात्रों से मिले और उन्हें देश का भविष्य बताते हुए सफल छात्र जीवन जीने की सीख दे गए थे।
अटल जी के लिए कही गई यह बात हुई सत्य
देश के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी 24 जनबरी 1990 में तिर्वा रोड स्थित सीताराम हीरो देवी सरस्वती शिशु मंदिर का उद्घाटन करने आये थे। स्कूल के प्रबंधक प्रवीण टंडन, प्रमोद दुबे छन्नू , नीरज महरोत्रा, कैलाश नारायण टंडन, विजय नारायण टंडन, वैकुण्ठ नारायण मिश्रा, बाबू केशवदास टंडन और उमाकांत मिश्रा आदि लोग स्कूल में मौजूद थे। तब कार्यक्रम का संचालन करते हुए उमाकांत मिश्रा ने कहा कि अटल जी देश के भावी प्रधानमंत्री हैं। उनका यह कथन बाद में सही साबित हुआ था।
कमजोर वर्ग के लिए थी दिल में तड़प
वरिष्ठ भाजपा नेता बाबू केशव दास टंडन बताते है कि 1990 में वह स्कूल का उद्धघाटन करने आए थे, तब उन्होंने अपने चिरपरिचित अंदाज में रार नहीं ठानूंगा, हर नहीं मानूंगा कविता सुनाकर अपने मजबूत इरादों की झलक प्रस्तुत की थी। वो आज भी उनके कानो में गूंजती है। बैकुंठ नारायण मिश्रा कहते हैं की जब उनकी अटल जी से मुलाकात होती थी तब वह जिले की राजनीति पर चर्चा जरूर करते थे। जोर देते थे कि वह समाज के कमजोर वर्ग की आवाज हमेशा उठाते रहें।