शंकराचार्य और उनके शिष्यों के कथित अपमान और यूजीसी के नए नियम के विरोध में बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने सोमवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। चार पन्नों के अपने इस्तीफे में पीसीएस अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री ने केंद्र और राज्य सरकार को कटघरे में खड़ा किया।
कानपुर के केशवनगर डब्लू ब्लॉक स्थित एक सामान्य से दो मंजिला मकान में इन दिनों सन्नाटा और चिंता का माहौल है। इसी मकान में पीसीएस अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री के परिजन रहते हैं। मकान के बाहर ‘जय बजरंगबली निवास’ लिखा बोर्ड लगा है। अंदर एक कमरे में उनकी मां गीता अग्निहोत्री आराम कर रही हैं। परिजनों के मुताबिक, बेटे के इस्तीफे की खबर के बाद उनका रक्तचाप बढ़ गया है और वे किसी से बातचीत नहीं कर रही हैं।
ड्राइंगरूम में बैठे अलंकार के ताऊ, सेवानिवृत्त विंग कमांडर एसके अग्निहोत्री ने बताया कि अलंकार ने परिवार में किसी को भी अपने इस्तीफे के बारे में पहले से नहीं बताया था। इसकी जानकारी उन्हें बहू आस्था से मिली। उन्होंने कहा कि परिवार ने आस्था को भरोसा दिलाया है कि इस फैसले में पूरा परिवार अलंकार के साथ खड़ा है।
अलंकार के ताऊ एसके अग्निहोत्री ने बताया कि इस्तीफे के बाद से उनकी अलंकार से सीधे बात नहीं हुई है, लेकिन बहू आस्था से संपर्क में हैं। उन्होंने कहा कि परिवार ने आस्था को धैर्य रखने को कहा है। ताऊ ने कहा, ‘अलंकार ने जो भी किया है, वह सोच-समझकर ही किया होगा। कुछ परेशानियां आएंगी, पर परिवार उसके साथ हैं।’
अलंकार के पिता विजय अग्निहोत्री बैंक ऑफ बड़ौदा में कार्यरत थे। एक सड़क हादसे में उनका निधन हो गया था। परिजनों के अनुसार, अलंकार के पिता के निधन के बाद मां गीता अग्निहोत्री को बैंक में कैशियर की नौकरी मिली और उन्होंने अकेले दम पर सभी बच्चों की परवरिश की। सभी बच्चों ने बड़े शिक्षण संस्थानों से बीटेक किया। अलंकार के अलावा अन्य भाई-बहन बड़ी कंपनियों में ऊंचे पदों पर कार्यरत हैं।