पीएम आवास के लिए अब लोगों को भटकना नहीं पड़ेगा. शहर में बन रहे 10032 आवासों के सापेक्ष 10081 आवेदन आए हैं. ऐसे में 49 लोगों को छोड़कर सभी आवेदकों को आवास आसानी से मिल सकेंगे. लॉटरी के जरिए पीएम आवास का आवंटन किया जाएगा, जिससे किसी भी लाभार्थी को गलत तरीके से आवास का आवंटन न हो.
कानपुर। पीएम आवास के लिए अब लोगों को भटकना नहीं पड़ेगा. शहर में बन रहे 10032 आवासों के सापेक्ष 10081 आवेदन आए हैं. ऐसे में 49 लोगों को छोड़कर सभी आवेदकों को आवास आसानी से मिल सकेंगे. लॉटरी के जरिए पीएम आवास का आवंटन किया जाएगा, जिससे किसी भी लाभार्थी को गलत तरीके से आवास का आवंटन न हो. बता दें कि महाबली नगर और रामगंगा इन्क्लेव के लिए कुल 7643 आवेदन आए हैं. इसके अलावा सकरापुर में 2208 मकानों के सापेक्ष 1692 आवेदन और जाह्नवी व भागीरथी में 2208 मकानों के सापेक्ष 946 आवेदन आए हैं.
साफ़ हुई ये बात
ऑनलाइन और ऑफलाइन मोड में किए गए पीएम आवास के लिए आवेदन से यह साफ हो गया है कि लोग जाह्नवी व भागीरथी स्कीम में बन रहे 2208 पीएम आवास में रहने के लिए इंट्रेस्टेड नहीं हैं. यहां 2208 मकानों के सापेक्ष सिर्फ 946 आवेदन ही आए हैं. हालांकि लॉटरी के जरिए किसी भी आवेदक को किसी स्कीम में आवास आवंटित किया जा सकता है. आवास आवंटन होते ही लोगों को पैसा जमा करना होगा और केडीए से आगे की कार्यवाही करनी होगी. वहीं विभिन्न योजनाओं के तहत बन रहे 10,032 पीएम आवासों के लिए कार्य शुरू हो गया है.
जल्द शुरू करने जा रहा है काम
एनजीटी से शर्तों के साथ निर्माण की अनुमति मिलने पर अब केडीए सिग्नेचर सिटी में जल्द कार्य शुरू कराने जा रहा है. 2 दिन में तेजी के साथ कार्य शुरू कर दिया जाएगा. वहीं सोमवार को विश्वकर्मा जयंती के मौके पर केडीए के अधिकारियों ने सिग्नेचर सिटी में पूजा के साथ छोटे-मोटे कार्य शुरू कर दिए हैं. एक साल के अंदर सिग्नेचर सिटी को पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है.
जमीन को लेकर सुनवाई
लखनऊ में याचिका समिति के समक्ष न्यू ट्रांसपोर्ट की जमीन को लेकर सुनवाई की गई, जिसमें केडीए वीसी किंजल सिंह ने बताया कि 1968 में जमीन मालिक देवा सिंह से 5 बीघा 7 बिसवा जमीन एक्वायर की गई थी और 1970 में कब्जा लिया गया था. देवा सिंह के वारिस अमरजीत ने मौजूदा सर्किल रेट पर मुआवजे की डिमांड करते हुए एसडीएम कोर्ट में दावा ठोक दिया. यहां से मामला कमिश्नर और हाईकोर्ट तक गया, सभी जगहों पर फैसला अमरजीत सिंह के खिलाफ गया. आखिर में याचिका समिति के समक्ष मामला पेश किया गया, जिसमें याचिका समिति के अध्यक्ष ने सुनवाई करते हुए केडीए वीसी को मामले के पूरे दस्तावेज तलब करते हुए रिव्यू करने के निर्देश दिए हैं.