आप भी अब ये जानकर राहत की सांस ले लीजिए कि महिलाओं में फाइब्रोसिस या फाईब्राइड की गांठ से कैंसर होने का खतरा नहीं होता. महिलाओं की बच्चेदानी में यह गांठ किस जगह है और कितनी बड़ी है, इससे इसकी गंभीरता का पता चलता है.
कानपुर। आप भी अब ये जानकर राहत की सांस ले लीजिए कि महिलाओं में फाइब्रोसिस या फाईब्राइड की गांठ से कैंसर होने का खतरा नहीं होता. महिलाओं की बच्चेदानी में यह गांठ किस जगह है और कितनी बड़ी है, इससे इसकी गंभीरता का पता चलता है. इसकी जानकारी मुंबई से आए डॉ. प्रकाश त्रिवेदी ने दी.
17 करोड़ महिलाओं को है ये समस्या
यही नहीं इस क्रम में उन्होंने ये भी बताया कि देश में ही 17 करोड़ महिलाओं को इसकी समस्या है. 40 फीसदी मामलों में तो इसके इलाज की भी जरूरत नहीं पड़ती. नए रिसर्च से यह साबित हो चुका है कि इससे कैंसर का खतरा नहीं होता. हां, ब्लीडिंग की समस्या होने पर इसे ऑपरेट करने की जरूरत जरूर पड़ती है.
बच्चे के लिए है ये बड़ा खतरा
इस मौके पर इलाहाबाद से आईं डॉ. रंजना खन्ना ने महिलाओं में थायराइड को लेकर भी बातचीत की. उन्होंने कहा कि गर्भावस्था के दौरान टीएसएच लेवल की जांच जरूर करानी चाहिए. मौजूदा समय में हाइपो थायराइड की समस्या से बच्चों के दिमागी विकास पर प्रभाव पड़ता है. इसके साथ ही प्रेग्नेंसी में भी कई तरह की दिक्कतें आती हैं.
मिली ऐसी भी जानकारी
क्राइस्टचर्च मेडिकल सेंटर न्यूजीलैंड से आईं डॉ. अमिता राय ने नॉन इनवेसिव प्री नेटल टेस्टिंग की जानकारी दी. उन्होंने कहा कि देश में भी कई आईसीएमआर सेंटर्स में यह शुरू हो गया है. इसमें गर्भ में पल रहे बच्चे को कोई आनुवांशिक बीमारी है या नहीं, इस बात का पता लगाने के लिए अब बच्चे का ब्लड सैंपल लेने की जरूरत नहीं है. बल्कि मां के ब्लड सैंपल से ही इसका पता लगाया जा सकता है.
हुई इस बात पर भी चर्चा
मुंबई से आए डॉ. मिलिंद आर शाह ने रिपीटेड प्रेगनेंसी लॉस को लेकर बात की. उन्होंने कहा कि बच्चेदानी में डिफेक्ट, एंटी फास्फोलिपिड सिंड्रोम, विटामिन की कमी बार बार गर्भपात की बड़ी वजहें हैं. ऐसे में सबसे पहले इन वजहों को पहचानना जरूरी है.