आईआईटी सेना को अंतरराष्ट्रीय सीमा पर होने वाले परेशानियों को दूर करने के लिए नहीं तकनीकी विकसित करेगा। जिसके अंतर्गत अनमैंड आर्मी व्हीकल का भी निर्माण होगा। जिसके माध्यम से बारूदी सुरंग की जानकारी मिलेगी। इस संबंध में रक्षा मंत्रालय के रक्षा नवाचार संगठन और आईआईटी के बीच समझौता हुआ है

बारूदी सुरंग के विस्फोट से सेना को काफी नुकसान होता है। अब जमीन के अंदर बारूदी सुरंग से सेना के जवानों को बचाने आईआईटी अनमैंड आर्मी व्हीकल बनाने में लगा है। इस संबंध में एक एमओयू पर हस्ताक्षर किया गया है। रक्षा मंत्रालय के रक्षा नवाचार संगठन और आईआईटीके स्टार्टअप एक्यूवे सन एंड इनोवेशन सेंटर के बीच यह समझौता हुआ है। जिसके अंतर्गत आईआईटी सेना की डिमांड पर उनकी समस्याओं के समाधान के लिए नई तकनीकी विकसित करेगा। बीते 22 अप्रैल को इस संबंध में दोनों पक्षों के बीच समझौता हुआ है। आगे चलकर इसका लाभ नक्सली क्षेत्रों में भी किया जा सकता है। जहां बारूदी सुरंग से जवानों को काफी नुकसान होता है।
अंतरराष्ट्रीय सीमा पर दुश्मन सेनाओं द्वारा किसी भी सेना को क्षति पहुंचाने के लिए बारूदी सुरंग महत्वपूर्ण हथियार है। जिसके माध्यम से दुश्मन सेना काफी बड़ा नुकसान पहुंचा देते हैं। लेकिन अब यह गुजरे जमाने की बात होगी। आईआईटी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस वेस यूएवी यानी अनमैंड आर्मी व्हीकल विकसित कर रही है। इस संबंध में रक्षा मंत्रालय के रक्षा नवाचार संगठन और आईआईटीके स्टार्टअप इनक्यूबेशन एंड इन्नोवेशन सेंटर के बीच समझौता हुआ है।
समझौते के अनुसार आईआईटी को ₹10 करोड़ का बजट दिया जाएगा। जिसका उपयोग सेना द्वारा बताई गई समस्याओं पर अत्याधुनिक तकनीक से युक्त यंत्र बनाए जाएंगे। जिसमें अनमैंड आर्मी व्हीकल वे शामिल है। जो सेना को जमीन के अंदर बिछाई गई सुरंग से बचाएगी। आईआईटी ऑटोनामस अनमैंड सिस्टम, एडवांस्ड इमेजिंग, सेंसर सिस्टम, खगोलीय नेविगेशन प्रणाली, पहाड़ी या ऊंचाई वाले इलाके के लिए सिगनल इंटेलिजेंस सिस्टम, एक्सपेंडेबल एक्टिव डिकॉय आदि तकनीक विकसित करेगा।