Kanpur Kidney Racket: कानपुर में किडनी ट्रांसप्लांट के बड़े रैकेट का खुलासा, जिसमें गेमिंग ऐप के जरिए लड़कों को कर्ज में डुबोकर किडनी डोनेट करने पर मजबूर किया जाता था। जानिए कैसे काम करता था यह गिरोह...
Kanpur Kidney Racket: कानपुर में एक ऐसा मामला सामने आया है, जहां युवाओं के शौक को ही उनकी मजबूरी बना दिया गया। यहां एक ऐसा गिरोह एक्टिव था जो मोबाइल गेमिंग ऐप के जरिए पहले लड़कों को कर्ज के जाल में फंसाता था और फिर उनकी मजबूरी का फायदा उठाकर उनकी किडनी निकाल लेता था। पुलिस की अब तक की जांच में 50 से ज्यादा किडनी ट्रांसप्लांट के केस सामने आए हैं।
इस पूरे खेल के मास्टरमाइंड डॉक्टर और उनकी टीम टेलीग्राम पर ग्रुप चलाते थे। डॉ. अफजल और डॉ. मुदस्सिर अली नाम के डॉक्टर इन ग्रुप्स में गेमिंग टास्क के लिंक भेजते थे। शुरुआत में लड़कों को गेमिंग ऐप के जरिए बोनस फंड दिया जाता था, जिससे वे आसानी से जीत जाते थे। जब लोगों को गेम की लत लग जाती, तब उन्हें मुश्किल टास्क दिए जाते। हारने पर उन्हें गेम के अंदर ही उधार लेने का ऑपशन दिया जाता। जब उधार लाखों में पहुंच जाता, तब शुरू होता था असली खेल। उधार न चुका पाने पर गिरोह के लोग उन पर किडनी डोनेट करने का दबाव बनाते और बदले में 20 से 25 लाख रुपए देने का वादा भी करते।
जो लड़के किडनी देने से डरते, तब ये गिरोह उन्हें अमेरिका और लंदन का रिसर्च पेपर भेजता था। उनमें यह लिखा होता था कि इंसान एक किडनी के साथ भी सामान्य और लंबी जिंदगी जी सकता है। गिरोह का शिकार हुए आयुष नाम के युवक ने पुलिस को बताया कि उसे पूरी तरह तैयार करने के बाद ही ऑपरेशन टेबल तक ले जाया गया।
आयुष नाम के युवक के साथ भी यही हुआ। उसकी किडनी निकाल ली गई। जांच में पता चला कि उसका एक म्यूल बैंक अकाउंट दिल्ली में खोला गया था। इसका इस्तेमाल साइबर ठगी और मनी लॉन्ड्रिंग के पैसों को ठिकाने लगाने के लिए किया जाता है। कानपुर पुलिस अब इन खातों के ट्रांजेक्शन खंगाल रही है ताकि यह पता चल सके कि किडनी के सौदे का पैसा कहां-कहां जा रहा था।
कानपुर पुलिस ने इस मामले में अब तक डॉक्टर और ओटी टेक्नीशियन सहित 9 लोगों को गिरफ्तार किया है। जेल में बंद एजेंट शिवम अग्रवाल से भी पूछताछ की जा रही है। पुलिस का कहना है कि 6 और लोग हैं, जिन्हें जल्द ही पकड़ लिया जाएगा।