
Kanpur Police Negligence:कानपुर पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करने वाला एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। जिस आलू कारोबारी देवेश शुक्ला की तलाश में पुलिस की 11 टीमें लगातार दबिश दे रही थीं, उसी कारोबारी का 24 दिन पहले अज्ञात शव मानकर अंतिम संस्कार कराया जा चुका था। दो थानों के बीच समन्वय की कमी और रिकॉर्ड का मिलान न होने से यह गंभीर लापरवाही सामने आई, जिसने पुलिस व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
देवेश शुक्ला दो जुलाई को चकरपुर मंडी से रहस्यमय परिस्थितियों में लापता हो गए थे। तीन जुलाई को पनकी की मोरंग मंडी के पास एक गंभीर रूप से घायल व्यक्ति मिला। पनकी पुलिस उसे तत्काल उर्सला अस्पताल लेकर पहुंची, जहां छह जुलाई की देर रात इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। पहचान नहीं होने पर सात जुलाई को पंचनामा भरकर शव को अज्ञात के रूप में सुरक्षित रखा गया और 10 जुलाई को नियमानुसार अंतिम संस्कार करा दिया गया।
उधर, पांच जुलाई को सर्वोदय नगर थाने में देवेश शुक्ला की गुमशुदगी दर्ज कराई गई। इसके बाद पत्नी की तहरीर पर साझेदार संजू पाल, मुनीम टिंकू यादव और एक ऑटो चालक के खिलाफ अपहरण का मुकदमा दर्ज हुआ। पुलिस ने कई टीमें गठित कर लगातार तलाश शुरू की। जांच के दौरान संजू पाल को गिरफ्तार कर जेल भी भेज दिया गया, लेकिन किसी भी स्तर पर पनकी क्षेत्र में मिले अज्ञात घायल और लापता कारोबारी के बीच संबंध की जांच नहीं हो सकी।
जब परिजन स्वरूप नगर स्थित फोरेंसिक विभाग पहुंचे तो उन्हें बताया गया कि जिस व्यक्ति की वे तलाश कर रहे हैं, उसका अंतिम संस्कार कई दिन पहले ही किया जा चुका है। यह जानकारी मिलते ही परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। परिजनों और व्यापारियों ने सर्वोदय नगर थाने पहुंचकर पुलिस की लापरवाही के खिलाफ जमकर नाराजगी जताई और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की।पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मृतक के सिर पर गंभीर चोट और शरीर पर कई अन्य चोटों का उल्लेख किया गया है। इससे मौत की परिस्थितियों को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। परिवार का कहना है कि यदि समय रहते दोनों थानों के रिकॉर्ड का मिलान कर लिया जाता या अज्ञात शवों का डेटा सही तरीके से साझा किया जाता तो देवेश शुक्ला की पहचान पहले ही हो सकती थी और परिजनों को 24 दिन तक अपनों की तलाश में भटकना नहीं पड़ता।
पुलिस का कहना है कि अज्ञात शव मिलने पर पहचान कराने, फोटो प्रसारित करने और 72 घंटे तक शव सुरक्षित रखने की प्रक्रिया अपनाई जाती है। पहचान नहीं होने पर अंतिम संस्कार कर दिया जाता है, जबकि जांच जारी रहती है। हालांकि इस मामले में दो थानों के बीच सूचना का अभाव और समन्वय की कमी साफ दिखाई दे रही है। अब पूरे प्रकरण की जांच शुरू कर दी गई है और यह पता लगाया जा रहा है कि आखिर इतनी बड़ी चूक किस स्तर पर हुई। मामला सामने आने के बाद पुलिस महकमे में भी हड़कंप मचा हुआ है।
वहीं, कानपुर पुलिस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर जारी बयान में बताया कि 3 जुलाई 2026 को सचेंडी थाने में देवेश शुक्ला की गुमशुदगी और 5 जुलाई को अपहरण का मुकदमा दर्ज किया गया था। मामले में एक आरोपी संजू पाल को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है, जबकि अन्य नामजद आरोपियों के खिलाफ विवेचना जारी है। पुलिस के अनुसार, जांच में पता चला कि 3 जुलाई को देवेश शुक्ला पनकी क्षेत्र में घायल अवस्था में मिले थे। उपचार के दौरान 6 जुलाई को उनकी मृत्यु हो गई, जिसके बाद नियमानुसार पंचायतनामा और पोस्टमार्टम की कार्रवाई की गई। पुलिस का कहना है कि 1 अगस्त को वादी ने फोटो के आधार पर मृतक की पहचान की, जिसके बाद प्रकरण में आवश्यक विधिक कार्रवाई करते हुए विवेचना आगे बढ़ाई जा रही है। पूरे मामले की जांच अपर पुलिस उपायुक्त पश्चिम को सौंपी गई है और जांच में यदि किसी पुलिसकर्मी की लापरवाही सामने आती है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
कानपुर के जूही निवासी मनोज कुमार शुक्ला की चकरपुर मंडी में देवेश कुमार योगेश कुमार एंड संस के नाम से आढ़त है। उनके भाई देवेश शुक्ला दो जुलाई को मंडी गए थे, लेकिन घर वापस नहीं लौटे। काफी तलाश के बाद भी उनका कोई सुराग नहीं लगा। इसके बाद मनोज शुक्ला की तहरीर पर सचेंडी पुलिस ने पांच जुलाई को मंडी व्यापारी संजू पाल, उसके मुनीम टिंकू यादव और अज्ञात ऑटो चालक प्रांशु के खिलाफ अपहरण समेत अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज किया था। जांच के दौरान पुलिस ने मुख्य आरोपी संजू पाल को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया, जबकि मुनीम टिंकू यादव और ऑटो चालक प्रांशु अब भी फरार हैं।