कानपुर

Kanpur News: कुर्सी विवाद पर बवाल, जिलाध्यक्ष बीच कार्यक्रम से निकले बाहर,कांग्रेस का तंज ‘अनुशासन की अर्थी’

Kanpur BJP controversy:कानपुर में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बैठने को लेकर विवाद में भाजपा जिलाध्यक्ष अनिल दीक्षित नाराज होकर बाहर चले गए। बाद में तहसीलदार के मनाने पर वे लौटे। घटना का वीडियो वायरल, विपक्ष ने साधा निशाना।

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Mar 25, 2026

कानपुर,उत्तर प्रदेश सरकार के 9 साल पूरे होने के अवसर पर बुधवार को कानपुर में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस उस समय सुर्खियों में आ गई, जब कार्यक्रम के बीच भाजपा उत्तरी जिलाध्यक्ष अनिल दीक्षित नाराज होकर कुर्सी छोड़कर बाहर चले गए। बताया जा रहा है कि बैठने को लेकर हुए विवाद से वे असहज हो गए थे। इस दौरान कार्यक्रम में मौजूद अधिकारियों और नेताओं में भी हलचल मच गई। बाद में मान-मनौव्वल के बाद उन्हें वापस बुलाया गया। पूरे घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिस पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आने लगी हैं।

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क्या है पूरा मामला

प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रभारी मंत्री योगेंद्र उपाध्याय मौजूद थे और कार्यक्रम औपचारिक रूप से चल रहा था। इसी दौरान तहसीलदार सदर विनय द्विवेदी ने कथित तौर पर संगठन से जुड़े कुछ लोगों के बैठने को लेकर आपत्ति जताई, जिससे माहौल अचानक तनावपूर्ण हो गया। इस बात से नाराज होकर भाजपा उत्तरी जिलाध्यक्ष अनिल दीक्षित अपनी कुर्सी छोड़कर कार्यक्रम से बाहर निकल गए, जिससे वहां मौजूद नेताओं और अधिकारियों में हलचल मच गई।हालांकि मामला ज्यादा देर तक नहीं बढ़ा। थोड़ी ही देर बाद तहसीलदार विनय द्विवेदी खुद हाथ जोड़कर अनिल दीक्षित को मनाने के लिए बाहर पहुंचे। काफी देर तक समझाने-बुझाने और मान-मनौव्वल के बाद जिलाध्यक्ष मान गए और दोबारा कार्यक्रम स्थल पर लौट आए। इसके बाद उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस में शामिल होकर स्थिति को सामान्य किया।

जिलाध्यक्ष ने दी सफाई

घटना के बाद अनिल दीक्षित ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह सरकार के 9 साल पूरे होने की बैठक थी। उन्होंने बताया कि तहसीलदार ने उनसे कहा था कि यहां संगठन के लोगों को नहीं बैठना है, इसी कारण वह बाहर चले गए थे। बाद में जिलाधिकारी (DM) ने उन्हें बैठने की अनुमति दी, जिसके बाद वह वापस आकर कार्यक्रम में शामिल हो गए

विपक्ष ने साधा निशाना

इस घटना के सामने आने के बाद विपक्षी पार्टी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर तीखी प्रतिक्रिया दी। कांग्रेस ने ट्वीट करते हुए इसे “अनुशासन की अर्थी” बताया और कहा कि मंत्री की मौजूदगी में कुर्सी के लिए भिड़े भाजपाई, जनसेवा का दावा फेल।कानपुर में भाजपा की अंतर्कलह ने 'अनुशासित पार्टी' के मुखौटे को सरेआम उतार फेंका है। मंत्री योगेंद्र उपाध्याय की प्रेस कॉन्फ्रेंस में कुर्सी के लिए मची छीना-झपटी और नगर अध्यक्ष का गुस्से में बाहर निकल जाना भाजपा के भीतर की गहरी दरारों को जगजाहिर कर रहा है। जो पार्टी अपने पदाधिकारियों को एक मंच पर साथ नहीं बिठा सकती, वह प्रदेश चलाने के दावे कैसे कर सकती है? सत्ता के अहंकार में चूर नेताओं का यह बर्ताव साफ दर्शाता है कि इनके लिए जनसेवा से ज्यादा अपना 'पद और कद' महत्वपूर्ण है। 'सबका साथ' का नारा देने वाली भाजपा आज अपनों का ही साथ निभाने में पूरी तरह विफल साबित हो रही है।

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