Kidney Transplant Racket:कानपुर में अवैध किडनी ट्रांसप्लांट मामले में वायरल वीडियो सामने आया है, जिसमें एंबुलेंस चालक शिवम अग्रवाल खुद को डॉक्टर बनकर दक्षिण अफ्रीकी महिला मरीज का इलाज करता दिख रहा है, जिससे पूरे सिंडिकेट पर गंभीर सवाल उठे हैं।
कानपुर। अवैध किडनी ट्रांसप्लांट मामले में पुलिस जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे चौंकाने वाले खुलासे सामने आ रहे हैं। ट्रांसप्लांट सिंडिकेट चलाने के आरोप में घिरे एंबुलेंस संचालक शिवम अग्रवाल और उसके सहयोगियों के खिलाफ मिले फोटो और वीडियो ने पूरे नेटवर्क की परतें खोल दी हैं। पुलिस इन वीडियो को अहम साक्ष्य मानते हुए जांच को तेज कर रही है। वही यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल भी हो रहे हैं। हालांकि, वायरल वीडियो व फोटो की पुष्टि patrika.com नहीं करता है।
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पुलिस सूत्रों के अनुसार, एक वायरल वीडियो व फोटो में दक्षिण अफ्रीका से आई महिला मरीज के ट्रांसप्लांट के बाद की हालत दिखाई दे रही है। वीडियो में एंबुलेंस चालक शिवम अग्रवाल खुद को डॉक्टर की तरह पेश करते हुए नजर आता है। वह महिला मरीज अविका से उसकी तबीयत के बारे में पूछता है और उसकी परेशानी जानने की कोशिश करता है।महिला दर्द से कराहते हुए रोती नजर आती है और अपनी तकलीफ बताती है। इस दौरान शिवम उसे इंजेक्शन लगाने की बात करता हुआ सुनाई देता है। बिना किसी मेडिकल योग्यता के इस तरह इलाज करना पूरे मामले को और गंभीर बना देता है।
पुलिस अब इस पूरे मामले को एक बड़े सिंडिकेट के रूप में देख रही है। वीडियो में नजर आ रहे सभी लोगों की पहचान की जा रही है और उनकी भूमिका की जांच की जा रही है। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि इस रैकेट में किन अस्पतालों और डॉक्टरों की संलिप्तता हो सकती है।जांच एजेंसियों का कहना है कि वीडियो से कई अहम सुराग मिले हैं, जिनके आधार पर नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ा जा रहा है। पुलिस का दावा है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे हो सकते हैं।
अधिकारियों के अनुसार, लगातार पूछताछ और साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई तेज कर दी गई है। इस मामले में शामिल अन्य लोगों की गिरफ्तारी भी जल्द हो सकती है। पुलिस पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए हर पहलू पर गहन जांच कर रही है, ताकि ऐसे अवैध कारोबार पर पूरी तरह रोक लगाई जा सके।
कानपुर में किडनी तस्करी का एक बड़ा अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट (अवैध गिरोह) बीते सोमवार को पकड़ा गया था, जिसमें 5 डॉक्टरों सहित कई 8 लोग गिरफ्तार किए गए हैं। यह रैकेट गरीब लोगों को पैसों का लालच देकर उनकी किडनी 6-10 लाख रुपये में निकलवाता था और उसे जरूरतमंदों को 80-90 लाख रुपये में बेचता था। इसमें कई बड़े नामी अस्पताल और फर्जीवाड़े शामिल मिले थे।