Weather Update Kanpur:कानपुर में बदलते मौसम ने किसानों और आम लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। तेज हवाओं और बारिश से गेहूं की फसल गिरी, जबकि जुकाम-बुखार के मरीजों की संख्या बढ़ने से अस्पतालों में भीड़ उमड़ रही है।
कानपुर। जनपद में मौसम इन दिनों लगातार करवट बदल रहा है, जिससे आम जनजीवन के साथ-साथ किसानों की चिंताएं भी बढ़ गई हैं। शनिवार को एक बार फिर मौसम ने अपना मिजाज बदला। सुबह हल्की धुंध और आसमान में बदली के साथ दिन की शुरुआत हुई, लेकिन जैसे-जैसे दिन चढ़ा, धूप निकल आई और मौसम साफ हो गया। हालांकि तेज धूप के बावजूद तापमान सामान्य से करीब साढ़े चार डिग्री नीचे बना रहा, जिससे मौसम में ठंडक बनी रही।
देर रात तक जनपद में रुक-रुक कर बूंदाबांदी होती रही। शनिवार को करीब डेढ़ मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। इसके साथ ही उत्तर-पश्चिम दिशा से लगभग 6.5 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चली तेज हवाओं ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दीं। खेतों में खड़ी गेहूं की फसल हवा के दबाव में कई जगहों पर गिर गई, जिससे किसानों को नुकसान का सामना करना पड़ा।हालांकि मौसम साफ होते ही किसानों ने हिम्मत नहीं हारी। बड़ी संख्या में किसान अपने खेतों में पहुंच गए और लाही की थ्रेसिंग तथा धनिया की कटाई जैसे कार्यों में जुट गए। खेतों में एक बार फिर चहल-पहल देखने को मिली, लेकिन फसल नुकसान की चिंता किसानों के चेहरे पर साफ झलक रही थी।
चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (CSA) के मौसम विभाग के अनुसार, शनिवार को अधिकतम तापमान 26.1 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 17.4 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। उन्होंने बताया कि आने वाले पांच दिनों तक आसमान में आंशिक बादल छाए रहेंगे और तेज हवाएं चलती रहेंगी, लेकिन फिलहाल बारिश की कोई संभावना नहीं है।
मौसम में लगातार हो रहे बदलाव का असर लोगों के स्वास्थ्य पर भी साफ दिखाई दे रहा है। जुकाम, खांसी, बुखार और पेट दर्द जैसी बीमारियों के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। बड़ी संख्या में लोग इलाज के लिए अस्पतालों का रुख कर रहे हैं।शनिवार को अवकाश के बावजूद भी प्राइवेट व सरकारी अस्पतालों की ओपीडी में भारी भीड़ देखने को मिली।सरकारी अस्पतालों की ओपीडी का समय दोपहर 12 बजे तक था, लेकिन सुबह 11:30 बजे तक ही 402 नए और करीब 250 पुराने मरीज इलाज के लिए पहुंच चुके थे। मरीजों को पर्चा बनवाने और दवा लेने के लिए लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ा।