Kanpur Heatwave:कानपुर में बीते पांच वर्षों में तापमान 1.3 डिग्री बढ़ा है और इस साल 50°C तक पहुंचने का अनुमान है। अचानक तापमान गिरने से फसलें और स्वास्थ्य प्रभावित हो रहे हैं, जिससे मौसम को लेकर चिंता बढ़ गई है।
कानपुर में मौसम का मिजाज लगातार बदल रहा है और यह बदलाव अब साफ तौर पर महसूस किया जा सकता है। पिछले पांच वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो शहर का औसत तापमान करीब 1.3 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ चुका है। यह वृद्धि मामूली नहीं है, बल्कि आने वाले समय के लिए गंभीर संकेत दे रही है। वर्ष 2021 से 2025 के बीच तापमान में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिससे गर्मी का असर पहले से अधिक तीखा होता जा रहा है।
कानपुर में बीते वर्षों में अधिकतम तापमान 48.2 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच चुका है, जो सामान्य से काफी अधिक है। मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान है कि इस वर्ष यह आंकड़ा 50 डिग्री सेल्सियस तक जा सकता है। यदि ऐसा होता है तो यह शहर के लिए अब तक का सबसे भीषण गर्मी का दौर साबित हो सकता है। तापमान में यह बढ़ोतरी केवल एक स्थानीय समस्या नहीं है, बल्कि इसे जलवायु परिवर्तन का सीधा असर माना जा रहा है।
एक ओर जहां गर्मी लगातार बढ़ रही है, वहीं दूसरी ओर मौसम में अचानक बदलाव भी लोगों के लिए मुश्किलें खड़ी कर रहा है। हाल ही में दो-तीन दिनों के भीतर तापमान में 10 से 15 डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट दर्ज की गई। यह असामान्य बदलाव न केवल आम जनजीवन को प्रभावित करता है, बल्कि खेती-किसानी पर भी इसका सीधा असर पड़ता है।
मौसम के इस असंतुलन का सबसे ज्यादा नुकसान किसानों को झेलना पड़ रहा है। तापमान में अचानक बदलाव के कारण फसलों की वृद्धि प्रभावित हो रही है। कभी अत्यधिक गर्मी तो कभी अचानक ठंड जैसी स्थिति फसलों के लिए अनुकूल नहीं होती। इससे पैदावार घटने की आशंका बढ़ जाती है, जिसका असर किसानों की आय पर पड़ता है।
मौसम विशेषज्ञ डॉ. एसएन सुनील पांडेय के अनुसार, इन दिनों मौसम में हो रहे तेज उतार-चढ़ाव का सीधा असर लोगों की सेहत पर पड़ रहा है। अचानक तापमान बढ़ने और फिर तेजी से गिरने के कारण शरीर को अनुकूल होने का पर्याप्त समय नहीं मिल पाता। इसके चलते लोग सर्दी, जुकाम, बुखार और पाचन संबंधी समस्याओं से जूझ रहे हैं। खासकर छोटे बच्चे और बुजुर्ग इस बदलाव के प्रति अधिक संवेदनशील साबित हो रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि ऐसे मौसम में इम्यून सिस्टम कमजोर पड़ सकता है, जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए लोगों को सतर्क रहने, संतुलित आहार लेने और बदलते मौसम के अनुसार खुद को ढालने की जरूरत है, ताकि बीमारियों से बचा जा सके।