
कानपुर। कानपुर-बुंदेलखंड के 17 जिलों की 10 में 8 सीटों पर 29 अपैल को मतदान निपट गया। पिछले छह माह से घर से दूर गांव, कस्बों, शहर और मोहल्लों में भाजपा की जीत पक्की करने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगानें वाले अमित शाह की टीम के चाणक्य में शुमार मानवेंद्र सिंह ने पत्रिका संवददाता से बातचीत की और कई विषयो में खुलकर अपनी पार्टी का विजन रखा। इस दौरान उन्होंने बताया कि पिछले चुनाव में हम कन्नौज सीट महज कुछ वोटों से हार गए थे, पर सोमवार को हुई वोटिंग के बाद हम कह सकते हैं कि 2019 में भाजपा 10 में 10 सीटों पर जीत दर्ज करने जा रही है।
कौन हैं मानवेंद्र सिंह
मूलरूप से इटावा जिले के रहने वाले मानवेंद्र सिंह के पिता उन्हें लेकर कानपुर आ गए। विजय नगर में पूरा परिवार रहता है। मानवेंद्र जब महज पंद्रह साल के थे तब वो अपने पिता के साथ आरएएस की शाखाओं में जाते और स्वयसेवकों की सेवा करते। कुछ साल स्वयसेवक बनकर संघ की सेवा की फिर भाजपा में आ गए। एक साधारण कार्यकर्ता की तरह भाजपा के बड़े नेताओ की रैलियों और सभाओं की व्यवस्था करते। 2013 में जब अमित शाह को भाजपा ने यूपी की प्रभारी बनाया तो उन्होंने मानवेंद्र को कानपुर-बुंदेलखंड का अध्यक्ष नियुक्त किया। जिसका असर ये रहा कि इा परिक्षेत्र की 10 में 9 तो 52 विधानसभा सीटों में से 47 पर कमल खिला। इतना ही नहीं मायवती के गढ़ बुंदेलखंड में भाजपा ने बसपा का सफाया कर दिया।
10 में 9 पर भाजपा का कब्जा
राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के साथ मिलकर मानवेंद्र सिंह ने 2014 के लोकसभा चुनाव के लिए कानपुर-बुंदेलखंड में खास रणनीति के तहत काम किया और बीजेपी को 10 में से 9 सीटें दिलाने में अहम फैक्टर रहे। मानवेंद्र सिंह ने ग्रामीण क्षेत्रों में युवाओं से सीधा जुड़ने के साथ ही जातीय समीकरणों को बेहद नजदीकी से समझा बल्कि बूथ लेवल तक दलित, ओबीसी और महिलाओं से कार्यकर्ताओं को सीधे जोड़ा। मानवेंद्र की इसी रणनीति का नतीजा था कि बीजेपी की कानपुर-बुंदेलखंड में करीब एक लाख से ज्यादा सदस्यता हुई। जिसका फाएदा भाजपा को विधानसभा में भी मिला। यहां की 52 में 47 पर कमल खिला। बुदंलखंड में सपा-बसपा का पूरी तरह से सफाया हो गया।
गांव तक भाजपा को पहुंचाना
मानवेंद्र बताते हैं कि 2014 के चुनाव से पहले पार्टी की सबसे बड़ी चुनौती बीजेपी की शहरी पार्टी की छवि को खत्म करना था। हमलोगों ने राष्ट्रीय अध्यक्ष की मौजूदगी में उनके सामने एक प्रस्ताव रखा। जिसमें हमनें पंचायत के चुनाव में पार्टी को लड़वाए जाने की मांग रखी। पार्टी हाईकमान ने हमलोगों की बात को सुना और पार्टी को गांवों में पहुंचाने के लक्ष्य के साथ पंचायत चुनाव लड़वाया। जिसका नतीजा रहा कि गांव तक बीजेपी पहुंच गई। मानवेंद्र बताते हैं कि 2019 के चुनाव की घोषणा से पहले हम 17 जिलों की सभी ग्रामपंचायतों में चैपाल के साथ वहां कार्यकर्ताओं की फौज खड़ी कर दी। बताते हैं, नवंबर से लेकर मार्च तक हमें अपने घर आने का मौका नहीं मिला। जहां रात हो जाती, उसी गांव में खटिया पड़ जाती।
25 हजार बूथ अध्यक्ष
कानपुर-बुंदेलखंड की 10 लोकसभा सीटों पर 25 हजार बूथ अध्यक्ष, 147 मंडल अध्यक्ष, 35 विस्तारकों के नियुक्ति किया। इसके अलावा जातिगत समीकरणों को ध्यान में रखते हुए मानवेंद्र ने शुरुआती 25 लाख वोटरों का डेटा एकत्रित किया और फिर उसे जातिगत आधार पर बांटकर क्षेत्र के हिसाब से उपयुक्त जाति के लोगों को बूथ से लेकर जिला स्तर तक की कमिटियों में अहम जिम्मेदारी दी। मानवेंद्र कहते हैं कि बीजेपी काम करते समय किसी जाति या धर्म के बारे में नहीं सोचती। जिस तरह से पीएम मोदी सबका-साथ‘, सबका-विकास के तहत कार्य करते हैं दसी तरह हम भी संगठन में सबकी भागीदारी तय कर रखी है।
कन्नौज में खिलेगा कमल
मानवेंद्र सिंह कहते हैं कि पिछले चुनाव में भाजपा कुछ वोटों से कन्नौज सीट हार गई थी, लेकिन 29 अपैल को जित तरह से वोटिंग हुई और जमीन से हमें जो इनपुट मिले हैं उसके अनुसार हम कह सकते हैं कि 1996 के बाद 2019 में इत्र की नगरी में कमल खिलनें वाला है। मानवेंद्र सिंह ने कहा कि भाजपा के अंदर परिवारवाद को जगह नहीं। हमारे यहां पहले नेता को जमीन में रहकर काम करना पड़ता है। जनता के साथ जुड़नें वाले कार्यकर्ता को पार्टी टिकट देती है। मानवेंद्र कहते हैं कि भाजपा कानपुर-बंुदेलखंड की 10 में 10 सीटें जीतनें जा रही है।