कानपुर

गंगा जल से ज्यादा नालों में मिला ऑक्सीजन का स्तर, अब तो जलीय जीव भी खतरे में

जीवनदायिनी मां गंगा की शुद्धि के लिए ‘नमामि गंगे प्रोजेक्ट’ के तहत 1,000 करोड़ रुपए से ज्यादा का बजट खर्च कर दिया गया, लेकिन हकीकत अभी भी यह है कि गंगा में सीवेज और टेनरी वेस्ट को पूरी तरह से रोका नहीं जा सका है. पिछले दिनों एनजीटी की मॉनिटरिंग कमेटी के निरीक्षण में भी गंगा सफाई को लेकर किए जा रहे कार्यों की हकीकत सामने आ गई.

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Oct 30, 2018
गंगा जल से ज्यादा नालों में मिला ऑक्सीजन का स्तर, अब तो जलीय जीव भी खतरे में

कानपुर। जीवनदायिनी मां गंगा की शुद्धि के लिए ‘नमामि गंगे प्रोजेक्ट’ के तहत 1,000 करोड़ रुपए से ज्यादा का बजट खर्च कर दिया गया, लेकिन हकीकत अभी भी यह है कि गंगा में सीवेज और टेनरी वेस्ट को पूरी तरह से रोका नहीं जा सका है. पिछले दिनों एनजीटी की मॉनिटरिंग कमेटी के निरीक्षण में भी गंगा सफाई को लेकर किए जा रहे कार्यों की हकीकत सामने आ गई. इसी के साथ गंगा घाटों और गंगा में गिर रहे नालों का हाल पता किया गया तो एक और चौंकाने वाली सच्चाई सामने आई. वह ये कि गंगा में गिर रहे नालों का पानी गंगा की तुलना में जलीय जीव-जंतुओं के लिए ज्यादा अच्छा है. कारण ये है कि क्योंकि नाले के पानी में ऑक्सीजन की मात्रा गंगा के पानी से अधिक है. गंगा में गिर रहे जहर के कारण जलीय जीव-जंतुओं को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पा रहा है.

ऐसी मिली है जानकारी
जांच के दौरान पाया गया कि परमट घाट से गंगा में गिर रहे नाले के पानी में हजारों की संख्या में मछलियां मौजूद थीं, लेकिन वे गंगा के साफ पानी में नहीं जा रही थीं. टीम ने कई बार मछलियों को गंगा की ओर भेजने की कोशिश की, लेकिन मछलियां फिर लौटकर गिर रहे नाले के पानी के नीचे आ जा रही थीं. नाले के पानी से भीषण बदबू भी आ रही थी. स्थानीय लोगों ने बताया कि मछलियां हमेशा इसी पानी के नीचे रहती हैं.

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ऐसी सामने आई रिपोर्ट
नाले की पानी में जीवित मछलियों को देखकर टीम हैरत में पड़ गई. इस बारे में जब उ.प्र. पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी से बात की तो पता चला कि बिठूर और जाजमऊ के जना गांव में सैंपलिंग की गई थी, जिसकी रिपोर्ट के मुताबिक गंगा में जहर अब भी कम नहीं हुआ है. इससे जलीय जीवों की जिंदगी पर खतरा बरकरार है. करीब 22 किलोमीटर की दूरी में बायोकेमिकल ऑक्सीजन डिमांड (बीओडी) की मात्रा दोगुनी खतरनाक हो गई है. बिठूर घाट पर बीओडी का स्तर जहां 3.1 मिलीग्राम प्रति लीटर रहा. वहीं जना गांव में 614 मिलीग्राम प्रति लीटर रिकॉर्ड की गई.

आंकड़े चौंका देंगे आपको
बोर्ड की मॉनीटरिंग में बीओडी की मात्रा अधिक और घुलित ऑक्सीजन (डीओ) का स्तर कम मिला है. इसका मतलब यह है कि गंगा में ऑक्सीजन की मात्रा अब भी काफी कम है. डिसॉल्वड ऑक्सीजन (डीओ) का स्तर बिठूर में 5 मिलीग्राम प्रति लीटर मिला, जबकि जाजमऊ में यह घटकर 3.9 मिलीग्राम प्रति लीटर रिकॉर्ड किया गया. पीएच वैल्यू (रंग) में कोई खास अंतर नहीं मिला. बिठूर में इसकी मात्रा 6.85 और जाजमऊ में 5.66 मापी गई.

घट रही है ऑक्सीजन
पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड की रिपोर्ट में यह साफ हो गया है कि गंगा के लिए अब तक बहाए गए अरबों रुपए गंगा के काम नहीं आए हैं. गंगा में रोजाना 60.5 करोड़ लीटर से ज्यादा डोमेस्टिक वेस्ट गिर रहा है. इसके अलावा चोरी-छिपे टेनरी से निकलने वाला क्रोमियम भी भारी मात्रा में गंगा में बहाया जा रहा है. यही कारण है कि बिठूर से जाजमऊ के बीच में बैक्टीरिया की मात्रा 1000 गुना तक बढ़ गई है.

कम हो रही है ऑक्‍सीजन
इन बैक्‍टीरिया को पनपने के लिए ऑक्सीजन की आवश्यकता पड़ती है, जिससे पानी में मौजूद घुलित ऑक्सीजन कम होती जा रही है. बिठूर में इनकी मात्रा 3500 एमपीएन प्रति 100 मिली लीटर मापी गई, जबकि 22 किमी. के बाद इसका स्तर बढ़ कर 58,000 एमपीएन प्रति 100 मिली लीटर हो गया. वहीं सिंतबर में जाजमऊ के पास बैक्टीरिया की संख्या 110000 एमपीएन प्रति 100 मिली लीटर रिकॉर्ड हुई थी.

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Published on:
30 Oct 2018 02:00 pm
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