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अगले 7 दिन में कानपुर के सामने खड़ी हुई ‘गैस चेंबर’ बनने की स्थिति

कानपुर में बीते एक हफ्ते में प्रदूषण का स्तर तेजी से बढ़ा है. हालात देखकर इस बात की पूरी आशंका है कि दिवाली तक शहर गैस चेंबर में तब्दील हो जाएगा. पिछले दिनों भी कानपुर में प्रदूषण का स्तर मानक से 7 गुना से ज्यादा रहा.
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कानपुर

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Alok Pandey

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Updated: 30 Oct 2018, 1:45 PM IST

Kanpur

अगले 7 दिन में कानपुर के सामने खड़ी हुई ‘गैस चेंबर’ बनने की स्थिति

कानपुर। कानपुर में बीते एक हफ्ते में प्रदूषण का स्तर तेजी से बढ़ा है. हालात देखकर इस बात की पूरी आशंका है कि दिवाली तक शहर गैस चेंबर में तब्दील हो जाएगा. पिछले दिनों भी कानपुर में प्रदूषण का स्तर मानक से 7 गुना से ज्यादा रहा. इस लिहाज से कानपुर देश का सबसे ज्‍यादा प्रदूषित शहर था, लेकिन इन हालात को बदलने में न तो मौसम से कोई मदद मिलेगी और सरकारी स्तर पर तो कोई प्रयास शुरू ही नहीं हुआ है. एक तरफ राष्ट्रीय राजधानी जहां कानपुर के मुकाबले कम प्रदूषित है, वहां सभी तरह के कंस्ट्रक्शंस पर रोक लगा दी गई हैं वहीं कानपुर में ऐसा कुछ भी होता नहीं दिख रहा. बल्कि लगातार कूड़ा जलाने और सड़कों से उड़ रही धूल हालात को और खराब कर रहे हैं. डॉक्टर्स और पर्यावरण विशेषज्ञों की मानें तो ऐसे हालत में स्वस्थ लोगों पर भी प्रदूषण का प्रभाव पड़ेगा.

जीना हो जाएगा दूभर
पिछले एक हफ्ते में प्रदूषण का स्तर तेजी से बढ़ा है. इससे आबोहवा लगातार जहरीली हो रही है. 7 नवंबर को दिवाली उसके बाद 3, 4 दिन तक यह स्तर और भी ज्यादा बढऩे की आशंका है. यूपी पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी कुलदीप मिश्रा के मुताबिक ठंड बढ़ने के साथ ही प्रदूषण का स्तर बढ़ा है. बोर्ड की तरफ से गाइडलाइन जारी की गई है, जिसका पालन करना होगा. नहीं तो प्रदूषण का स्तर और भी ज्यादा तेजी से बढ़ेगा.

ऐसे मिली थी राहत
पिछले साल दिवाली के दौरान ही शहर में प्रदूषण का स्तर काफी ज्यादा था. उस वक्‍त जिला प्रशासन और नगर निगम की ओर से कूड़ा जलाने पर प्रतिबंध लगाने के साथ ही सड़कों पर पानी का छिड़काव कराया गया था. इसका कुछ ही दिनों में असर भी दिखा था और प्रदूषण का स्तर काफी कम भी हुआ था, हालांकि इस बार अभी तक ऐसे कोई प्रयास नहीं हुए हैं.

मार्निंग वॉकर्स पर पड़ेगा असर
प्रदूषण के बढ़ते स्तर को देखते हुए सीपीसीबी की ओर से चेतावनी जारी की गई है कि इन हालातों में मार्निंग वॉक करना सेहत के लिए ठीक नहीं है. प्रदूषण के बढ़ते स्तर और उसके प्रभाव को लेकर वरिष्ठ छाती रोग विशेषज्ञ डॉ. आनंद कुमार के मुताबिक पीएम-2.5 या पीएम10 की वातावरण में ज्यादा मात्रा से इसके कण शरीर में जाएंगे. इससे सांस की नली में सूजन की समस्या और सांस लेने में तकलीफ होगी. इसके साथ ही लंग्स इंफेक्शन की समस्‍या भी हो सकती है. ऐसे हाल में बीमार लोग, बुजुर्ग, बच्चे और गर्भवती महिलाओं को खास बचाव की जरूरत है.