
इस दिवाली में बजेंगे प्रदूषण मुक्त पटाखे, वैज्ञानिक सामने लाए नया विकल्प
नई दिल्ली। पर्यावरण अनुकूल दिवाली को बढ़ावा देने के लिए,वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) के वैज्ञानिकों ने कम प्रदूषणकारी पटाखों को विकसित किया है जो न केवल पर्यावरण के अनुकूल हैं बल्कि सस्ते भी हैं। केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री हर्षवर्धन ने यहां एक सम्मेलन में कहा कि सीएसआईआर वैज्ञानिकों ने कम प्रदूषण वाले पटाखे विकसित किए हैं जो न केवल पर्यावरण के अनुकूल हैं बल्कि पहले की तुलना में 15-20 फीसदी सस्ते हैं। इन पटाखों को सेफ वॉटर रिलीजर (एसडब्ल्यूएएस), सेफ मिनिमल एल्यूमिनियम (सैफल)और सेफ थर्माइट क्रैकर (स्टार) नाम दिया गया है।
गैस का उत्सर्जन कम होगा
इन पटाखों की खासियत है कि यह खतरनाक गैस उत्सर्जन नहीं करते हैं। इन पटाखों के फूटने पर सिर्फ पानी का भाप उड़ता दिखाई देता है। इसके साथ जो धुआं निकलेगा वह किसी पहले के पटाखों के मुकाबले कम हानिकारक है। एसडब्ल्यूएएस पटाखों में पटेशियम नाइट्रेट और सल्फर को नहीं रखा जाता है। इससे पार्टिकुलेट मैटर को 30 से 35 प्रतिशत तक कम किया जा सकता है।
ध्वनि प्रदूषण होगा कम
पटाखों के सैफल संस्करण के मुकाबले व्यावसायिक पटाखों की तुलना में कण पदार्थ (35-40 प्रतिशत) में महत्वपूर्ण कमी के साथ एल्यूमीनियम का न्यूनतम उपयोग होता है। दिलचस्प बात यह है कि सभी पटाखे 105-110 डेसीबल (डीबीए) की श्रेणी की सीमा तक ध्वनि तीव्रता रखते हैं। सुरक्षा,स्थिरता और अन्य संबंधित मुद्दों के दृष्टिकोण से इन पटाखों का विश्लेषण और परीक्षण करने के लिए पेट्रोलियम और विस्फोटक सुरक्षा संगठन (पीईएसओ) से भी संपर्क किया गया है।
गहरी दिलचस्पी दिखाई है
गौरतलब कि भारतीय आतिशबाजी उद्योग छह हजार करोड़ रुपये का वार्षिक कारोबार और पांच लाख से अधिक परिवारों को प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से रोजगार के अवसर प्रदान करता है। हर्षवर्धन ने आगे कहा कि सीएसआईआर का उद्देश्य प्रदूषण की चिंताओं को संबोधित करना और इस व्यवसाय में शामिल लोगों की आजीविका की रक्षा करना है। उन्होंने यह भी बताया कि कई फायरक्रैकर निर्माताओं ने पूरे प्रक्रिया में प्रयोगशालाओं के साथ गहरी दिलचस्पी ली है।
Published on:
30 Oct 2018 09:11 am
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