12 साल से कम उम्र की बच्च्यिं के साथ रेपिस्ट को मिलेगी मौत, कानपुर के लोगों ने निणर्य की सराहना
कानपुर। जिस तरह से पिछले कुछ माह के दौरान किशोरियों के साथ रेप के साथ हत्या के मामले बढ़े उससे दिल्ली सरकार हिल गई। मोदी सरकार ने पोस्को एक्ट (प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रेन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंस ) में संसोघन की मंजूरी दे दी है। इसके तहत यदि कोई भी व्यक्ति 12 साल या उससे कम उम्र की बच्ची के साथ दुष्यकर्म करेगा तो उसे फांसी की सजा दी जाएगी। इसकी जानकारी जब कानपुर के लोगों को हुई तो वह बहुत खुश नजर आए। भाजपा महिला नेता सोफिया अली, जो खुद पीड़िता ने बताया कि यह कानून बहुत पहले आ जाना चाहिए था। उन्नाव, कटुआ, सूरत और कानपुर में जिस तरह से किशोरियों को हवश का शिकार बनाया गया उसकी इजाजद सभ्य समाज नहीं देता। सरकार का यह कदम सरहनीय है और आधीआबादी केंद्र सरकार के निर्णय से खुश है।
पास्टो एक्ट कानून में संसोधन
उन्नाव, कठुआ, सूरत कानपुर में सहित पूरे देश में नाबालिग बच्च्यिं के साथ रेप की घटनाओं में जबरदस्त इजाफा हुआ है। ऐसी घटनाओं को लेकर देशभर में गुस्से के माहौल है। कानुपर में कईदिनों से लेग कैंडिल मार्च निकाल कर रेप के आरोपियों को फांसी दिए जाने की मांग कर रहे थे। साथ ही कई राजनीतिक दलों से भी यह आवाज उठने लगी थी कि नाबालिग के साथ दुष्कर्म करने वालों को कड़ी से कड़ी सजा मिले। इसी के बाद केंद्र सरकार बच्चों को यौन अपराधों से संरक्षण अधिनियम (पोक्सो) में संशोधन के लिए अध्यादेश लाने की योजना बना रही थी. पॉक्सो कानून के फलिहाल प्रावधानों के अनुसार इस जघन्य अपराध के लिए अधिकतम सजा उम्रकैद है। वहीं, न्यूनतम सजा 7 साल की जेल है। लेकिन अब नए कानून के तहत पास्को एक्ट के तहत आरोपी को फांसी की सजा होगी।
ऐसे इंसानों को जीने का नहीं हक
सोफिया ने कहा कि देश की आजादी के 70 साल बीत जाने के बाद आधीआबादी के साथ आज भी उत्पीड़न जारी है। महिला उत्पीड़न को रोकने के लिए सरकारों ने कई कानून बनाए, लेकिन आरोपी कानूनी दांव-पेच के जरिए न्यायालयों से बच जाते हैं। ऐसे कई मामले हैं जिन पर आरोपियों को सुप्रीम कोर्ट फांसी की सजा दे चुका है, बावजूद वह चौदह से पंद्रह सालों से जेलों में बंद हैं। सोफिया ने निठारी कांड के साथ ही निर्भया के दोषियों को फांसी की सजा हो चुकी है, बावजूद उस पर अमल नहीं किया गया। सोफिया ने सरकार से मांग की है कि रेप के आरोपियों की सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन करें और एक साल के अंदर सुनवाई कर उन्हें सजा दे। रेप के आरोपियों को सथ्य समाज में जीने का कोई हक नहीं। वी इंसानियत के नाम पर कलंक हैं।
इस तरह से आरोपियों को मिलेगी सजा
नए कानून के तहत 12 साल की बच्चियों से रेप पर फांसी की सजा दी जाएगी। 16 साल से छोटी लड़की से गैंगरेप पर आरोपी को उम्रकैद की सजा भुगतनी पड़ेगी। 16 साल से छोटी लड़की से रेप पर कम से कम 20 साल तक की सजा होगी। सभी रेप केस में 6 महीने के भीतर फैसला सुनाना होगा। नए संशोधन के तहत रेप केस की जांच पुलिस को महत 60 दिन के अंदर ं पूरी करनी होगी। इसके अलावा आरोपियों को अब अग्रिम जमानत नहीं मिलेगी। वहीं महिलाओं के साथ दुष्कर्म के आरोपी की सजा सात साल से बढ़ाकर 10 साल कर दी गई है। सोफिया ने कहा अब बच्चियों को जल्इ इंसाफ मिल जाएगा। उनके साथ घिनौना कृत्य करने वाले आरोपी कानूनी दांव-पेच से बच नहीं सकेंगे। सोफिया ने कहा कि मोदी सरकार महिलाओं के लिए अच्छा कार्य कर रही है। आज का निर्णय मील का पत्थर साबित होगा।