कानपुर

निकाय चुनाव के परिणाम इस नेता पर पड़ेंगे भारी, हार के बाद शिवपाल बना सकते हैं नई पार्टी

मुलायम सिंह के अखिलेश के पक्ष में खड़े होने के बाद शिवपाल खासे नाराज हैं...

3 min read
Dec 01, 2017
निकाय चुनाव के परिणाम इस नेता पर पड़ेंगे भारी, हार के बाद शिवपाल बना सकते हैं नई पार्टी

कानपुर. उत्तर प्रदेश में निकाय चुनाव के लिए मतगणना जारी है। सूबे में निकाय चुनाव में 53 फीसदी वोट पड़े। चारों राजनीतिक दलों के नेताओं की नजर अब मतगणना पर लगी हैं। भाजपा, कांग्रेस और बसपा के अंदर जीत-हार को लेकर माथा-पच्ची लगी है तो सपा में भी परिणाम आने के बाद बवंडर आना तय है। मुलायम सिंह के अखिलेश के पक्ष में खड़े होने के बाद शिवपाल खासे नाराज हैं और इसकी शुरुवात उन्होंने मथुरा में की थी। जहां बयान देकर उन्होंने अखिलेश यादव और उनकी पूर्ववर्ती सरकार को घेरने की कोशिश की थी। उन्होंने कहा था कि यदि अखिलेश यादव ने मुलायम सिंह यादव को अध्यक्ष बने रहने दिया होता तो इस वर्ष हुए विधानसभा चुनाव में भी समाजवादी पार्टी की ही सरकार बनती। इसके अलावा कानपुर में एक निजी कार्यक्रम में आए शिवपाल यादव ने पूर्व सीएम अखिलेश के काम-काज पर सवाल उठाए थे और निकाय चुनाव में पार्टी के प्रदर्शन के बाद अपने अलग कदम की बात कही थी। इसी के चलते सपा में फिर से टकरार हो सकती है और भतीजे को छोड़ चाचा नई पार्टी का ऐलान कर सकते हैं।

मुलायम पर भारी पढ़ रही सियासत

पहलवान से टीचर और फिर सियासत में कदम रखने वाले मुलायम सिंह उन नेताओं में से हैं, जिन्होंने कभी हार नहीं मानी और सत्ता के लिए जिससे चाहा हाथ मिला लिया और फिर छोड़ दिया। मुलायम सिंह ने यूपी से 1989 में कांग्रेस को उखाड़ फेका और लखनऊ की कुर्सी पर बैठे। रामंमदिर आंदोलन के दौरान उनका नाय नाम सामने आया और एक समुदाय का साथ साइकिल को मिल गया। तीन दशक तक वो इसी के चलते यूपी में राजनीतिक पारी खेलते रहे। उनके हर कदम पर छोटे भाई शिवपाल का साथ रहा। पत्नी की मौत के बाद मुलायम ने बेटे अखिलेश की परवरिस की जिम्मेदार शिवपाल को दी और 2012 में भाई की जगह कुर्सी बेटे को दी। यहीं से सपा परिवार के अंदर रार शुरू हो गई और 2017 आते-आते इसने बड़ा रूप धर लिया। बेटे ने पिता को कुर्सी से बेदखल कर खुद बैठ गया और चाचा को दल से बाहर कर दिया। बावजूद शिवपाल अपने भाई के साथ खड़े नजर आए।

परिणाम के बाद रास्ते हो सकते हैं अलग

भतीजे अखिलेश यादव ने शिवपाल यादव से पार्टी के सारे पद छीन लिए और उन्हें इटावा तक सीमित कर दिया। जिसका नतीजा रहा कि विधानसभा चुनाव में सपा को करारी हार उठानी पड़ी। निकाय से पहले चाचा और भतीजे के बीच सुलह की चर्चाएं चली, लेकिन वो पूरी नहीं हो सकीं। वहीं मुलायम सिंह भाई की जगह बेटे के साथ अधिकतर समय खड़े रहे। नेताजी की लगातार उपेक्षा से आहत शिवपाल सिंह यादव की अब राह जुदा होने जा रही है। इसका आधिकारिक एलान अब तक शिवापल ने नहीं किया है लेकिन जिस तरह समर्थकों से नए राजनीतिक दल को लेकर शिवपाल खेमा राय शुमारी करा रहा है उससे साफ है कि जल्द ही शिवपाल उत्तर प्रदेश की सियासत में नई पारी की शुरुवात करेंगे। सूत्रों की मानें तो शिवपाल यादव का खेमा निकाय परिणाम की हार के बाद खुलकर सामने आ सकता है और मुलायम सिंह यादव को पार्टी का नया अध्यक्ष बनाने की मांग उठा सकता है। अगर दूसरा खेमा इस पर तैयार नहीं हुआ तो शिवपाल अपना अगल रास्ता बना लेंगे।

कानपुर में भी बट सकती है सपा

निकाय चुनाव के वक्त टिकट वितरण के समय सपा विधायक इरफान सोलंकी, नगर अध्यक्ष फजल महमूद की चली। जिसके चलते पुराने सपा कार्यकर्ता नाराज हो गए और पार्टी कार्यालय में तोड़फोड के साथ जमकर बवाल किया था। नगर अध्यक्ष को मौके से भागना पड़ा था। जानकारों का कहना है कि 110 पार्षद पद के टिकट इरफान और फजल महमूद के करीबियों को दिए गए। जबकि दूसरे खेते के नेताओं ने विरोध किया। बात राष्ट्रीय अध्यक्ष तक पहुंची और दोनों खेमों को एक कराया गया, लेकिन जमीन पर खटास दिखी। पूर्व विधायक, व एक वर्तमान विधायक सपा प्रत्याशियों के प्रचार की जगह निर्दलीय को सपोर्ट करते हुए पाए गए। अगर कानपुर में पार्टी अच्छा नहीं करती तो ये तय है कि यहां भी दो फाड़ होने तय। इसके लिए दूसरे खेमे के नेताओं की बैठक भी हुई और शिवपाल यादव को पूरी जानकारी भी दी गई।

निर्दलीय के लिए किया प्रचार, राममंदिर पर दी राय

समाजवादी पार्टी से शिवपाल सिंह यादव किस कदर खफा हैं इसकी बानगी जसवंतनगर है। जहां नगर निकाय चुनाव में उन्होंने निर्दलीय प्रत्याशी को समर्थन देकर पार्टी के थिंक टैंक को सोचने पर मजबूर कर दिया है। जसवंतनगर से सपा ने अपना अधिकृत प्रत्याशी चुनाव मैदान में उतारा है। कानपुर में जब उनसे यूपी के निकाय चुनाव में प्रचार न करने का सवाल किसा गया तो शिवपाल सिंह यादव ने कहा कि कल निकाय चुनाव का परिणाम आयेगा तो पता चल जायेगा किसकी जीत हुई है। साथ ही पार्टी के लाइन के विपरत जाकर उन्होंने अयोध्या में रामंमदिर निर्माण की बात कही। इसके चलते पार्टी के अंदर जबरदस्त उथल-पुथल मची है और एक दिसबंर की शाम तक सपा के अंदर की रार फिर से बाहर आ सकती है।

ये भी पढ़ें

कानपुर की सिकंदरा सीट से ये होंगे कांग्रेस प्रत्याशी, कभी महिमा चौधरी ने किया था प्रचार
Published on:
01 Dec 2017 09:56 am
Also Read
View All