उत्तर प्रदेश के कानपुर में हिंसा के बाद अब लगातार बयानबाजी का दौर चल रहा है. जिसमें नूपुर के समर्थन में तमाम हिंदूवादी संगठन भी आ चुके हैं. ऐसे में कानपुर के शहर काजी ने एक और भडकाऊ बयान जारी किया , जिसमें कहा गया है कि अब मुसलमान चुप नहीं बैठेगा। सर पर कफ़न बांधकर सड़कों पर उतरने को मजबूर हैं हम.
उत्तर प्रदेश के कानपुर में हुई हिंसा को लेकर पूरे देश भर में बवाल मचा हुआ है. जिसमें अब तक इस्लामिक देशों के दबाव में मुहम्मद पर बयान देने वाली नूपुर को भाजपा ने पार्टी से निकाल दिया है. वहीं कानपुर से शहर काजी मौलाना अब्दुल कुद्दूस हादी का एक बयान सामने आया है. इसमें उन्होंने कहा कि, अगर पुलिस एकतरफा कार्रवाई करते हुए हमारे घरों पर बुलडोजर चलाएगी तो हम चुप नहीं बैठेंगे. हम सड़क पर कफन बांधकर निकलेंगे. उन्होंने पुलिस कमिश्नर से भी शिकायत की है, उनका कहना है कि पुलिस के एक्शन से एक समुदाय में असंतोष है. शहर काजी का दावा है कि बम फेंके जाने का जो नया वीडियो सामने आया है. उसमें हिन्दू पक्ष के लोग बम फेंकते दिखाई दे रहे हैं. हालांकि, यह जांच के बाद ही साफ हो सकेगा।
मुस्लिम देशों के संगठन के भारी विरोध के बाद मुहम्मद पर बयान देने वाली नूपुर को भाजपा ने बाहर का रास्ता दिया है वहीं शहर काजी का दावा है कि बम फेंके जाने का जो नया वीडियो सामने आया है. उसमें हिन्दू पक्ष के लोग बम फेंकते दिखाई दे रहे हैं. हालांकि, यह जांच के बाद ही साफ हो सकेगा.
Kanpur Violence and Organization of Ismalim Country
उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले में हुई हिंसा के बाद से ही वहां तनाव बना हुआ है. ये राष्ट्रपति के दौरे वाले दिन ही हुई है. इस दिन प्रदर्शन करने के लिए जगह जगह पोस्टर लगाए गए थे. जिसमें जुम्मे की नमाज़ के बाद ये गए. मुस्लिमों की और से नूपुर के बयान को जताते हुए जोरदार पत्थरबाजी भी की गई थी. साथ ही कुछ जगहों पर गोलियां चलने की आवाज़ भी सुनने को मिली थी. अब फिलहाल पुलिस ने गिरफ्तार करने का दावा किया है. जिसमें पीएफआई का हाथ होना भी बताया जा रहा है.
OIC पर भड़की भारत सरकार
भारत सरकार की और से विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने ओआईसी महासचिव की टिप्पणी को खारिज करते हुए कहा कि, 'भारत सरकार ओआईसी सचिवालय की तरफ से की गई अनुचित और संकीर्ण सोच वाली टिप्पणियों को स्पष्ट रूप से खारिज करती है. भारत सरकार सभी धर्मों को सर्वोच्च सम्मान देती है.'
भारत हर धर्म और मज़हब वालों
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि, एक धार्मिक व्यक्तित्व को बदनाम करने वाले आपत्तिजनक ट्वीट और टिप्पणियां कुछ लोगों द्वारा की गई थी. वे किसी भी रूप में भारत सरकार के विचारों को प्रतिबिंबित नहीं करते हैं. उन व्यक्तियों के खिलाफ संबंधित संस्थाएं पहले ही कड़ी कार्रवाई कर चुकी हैं.
भारतीय विदेश मंत्रालय के बयान में कहा गया, 'यह खेदजनक है कि ओआईसी सचिवालय ने एक बार फिर से प्रेरित, भ्रामक और शरारतीपूर्ण टिप्पणी की है. ये केवल निहित स्वार्थों के इशारे पर अपनाए जा रहे विभाजनकारी एजेंडे को दिखाता है. हम ओआईसी सचिवालय से अपने सांप्रदायिक दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने से रोकने और सभी धर्मों के प्रति उचित सम्मान दिखाने का आग्रह करेंगे.'