जगर बांध पर चादर चलने से 28 वर्ष के अंतराल के बाद जगर नदी के जीवंत होने से क्षेत्र के लोग उत्साहित है। क्षेत्र के लबालब हुए बांध के जल की आस्था के साथ पूजा कर आचमन कर रहे हैं।
हिण्डौनसिटी (करौली)। जगर बांध पर चादर चलने से 28 वर्ष के अंतराल के बाद जगर नदी के जीवंत होने से क्षेत्र के लोग उत्साहित है। क्षेत्र के लबालब हुए बांध के जल की आस्था के साथ पूजा कर आचमन कर रहे हैं।
बुधवार को करसौली गांव के भक्त परिवार के नेतृत्व में आसपास के ग्रामीणों ने बगुलादेह मंदिर और बालाजी महाराज के मंदिर में पूजा अर्चना की। साथ ही बांध की सपाट(वेस्टवीयर) पर 151 फीट लंबी चुनरी ओढ़ा कर बांध में भरपूर पानी की आवक होने पर खुशी जताई।
भगत परिवार के समाजसेवी शेरा ठेकेदार ने बताया कि वर्ष 1957 में निर्मित हुए बांध में इस बार भरपूर पानी आया है। लगभग 28 वर्ष के बाद बांध पूरी तरह से लबालब हो बह रहा है। जो आस पास के करीब 26 गांवों को भूमि को सिंचित कर खुशहाली देगा।
लबालब हुए जगर बांध के छलने से बांध की डाउन स्ट्रीम से निकल रही जगर नदी जीवंत हो उठी है। बांध पर लगातार तीसरे दिन बुधवार को छह इंच मोटी चादर चलने से नदी में तेज प्रवाह बना हुआ है। बयाना मार्ग पर गांव जटनगला के पास से निकल रही जगर नदी के बहाव को देखने के लिए सुबह से ही कॉजवे पुल पर लोगों की भीड़ जमा हो गई। हिण्डौन-बयाना मार्ग स्थित कॉजवे पुल पर सुरक्षा दीवार व पिलर नहीं होने से नदी क्षेत्र में पुलिस-प्रशासन ने चौकसी बढ़ा दी।