2 June Ki Roti की रोटी के लिए यहां बीते हुए कल भी मजदूर का मेला लगता था, आज भी लगता है और शायद आने वाले कल भी लगता रहेगा।
2 june Ki Roti की रोटी के लिए जंग लड़ने वालों के लिए आज का दिन भी हर दिन की तरह सामान्य है लेकिन आज इस रोटी के लिए संघर्ष करने वाले चर्चा सामान्य दिनों की अपेक्षा अधिक होती है इसका काराण है आज की तारीख दो जून। लेकिन हर बार की तरह ये तारीख भी बदल जाएगी, बदलेगी नहीं 2 june ki roti के लिए संघर्ष करने वालों की तकदीर। वर्षों से इस बात की गवाही दे रहा है कासगंज शहर का सोरों गेट। यहां बीते हुए कल भी दो समय की रोटी कमाने के लिए मजदूर का मेला लगता था, आज भी लगता है और शायद कल भी लगता रहेगा।
कितनी सरकारें आईं और गईं, कितने दावे वादे किए गए लेकिन इन मजदूरों की तकदीर नहीं बदली। मजदूरों को 360 दिनों में से 250 दिनों का काम देने का वादा भी किया गया लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और है। मजदूर आज भी दो जून की रोटी कमाने के लिए दर दर ठोकरें खा रहा है।
सोरों गेट पर मजदूरों के मेले में दो जून की रोटी कमाने के लिए हर रोज बोली लगती है। कुछ मजदूरों को रोटी नसीब हो जाती है, कुछ लोगों को दो जून पर भी रोटी नसीब नहीं होती। जब हमने इन मजदूरों से बात की तो उन्होंने क्या साफ कहा कि ‘साहब मजूदरी की तलाश में आते हैं, लेकिन उन्हें मजूदरी नहीं मिलती है। जिससे परिवार के लिए दो जून की रोटी तक नसीब नहीं होती है। सरकार मनरेगा के तहत मजदूरी देने का दावा तो करती है, लेकिन इनसे में मजदूरी करने के बाद मेहनताना नहीं मिल पाता। इसलिए वह नकद मजदूरी के लिए रोजाना इस मेले में आते हैं।