कटनी

36 गांव में पेयजल को लेकर भीषण समस्या, जानिये कैसे अचानक निर्मित हो गई समस्या

जिले में चार दर्जन से अधिक नलजल योजना ठप, सैकड़ों हैंडपंप उगल रहे हवा
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Updated: 23 Apr 2018, 11:58 AM IST
At night Explosion in the well explosion People out of home Panic
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कटनी. जिले का तापमान ४० के पार पहुंच रहा है। हर क्षण भू-जल स्तर में न सिर्फ गिरावट आ रही है, बल्कि जल स्त्रोतों की सांसें भी टूट रही हैं। पेयजल के लिए शहर से लेकर गांव तक पेयजल का मंजर भयावह होता जा रहा है। रीठी, बहोरीबंद के पठार क्षेत्र सहित लगभग सभी ब्लॉक में पेयजल की गंभीर समस्या हो चली है। इसके बाद भी जिले का लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग गंभीर नहीं हैं। विभाग इस भीषण गर्मी में लोगों के कंठ तर करने के लिए कितना गंभीर है इस बात का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि जिले के लगभग आधा सैकड़ा गांवों में पिछले कई माह से नलजल योजनाएं ठप हैं, तीन सैकड़ा से अधिक हैंडपंप पानी की जगह हवा उगल रहे हैं। इतनी गंभीर समस्या होने के बाद भी उनका सुधार कार्य विभाग नहीं करा रहा। जिले में पेयजल की बेहतर व्यवस्था के लिए आदेश-निर्देश सिर्फ टीएल की बैठक तक ही सीमित रहे गए हैं। भीषण गर्मी में ग्रामीण व महिलाएं पेयजल के लिए जद्दोजहद कर रही हैं।

३६ नलजल की टूटी सांसें
पीएचई विभाग की लापरवाही के चलते पिछले कई माह से जिलेभर में ३६ नलजल योजनाओं की सांस टूटी हुई है। नलजल से प्यास बुझाने को लेकर आश्रित ग्रामीण पेयजल के लिए खासे परेशान हैं। जिलेभर में २८९ नलजल योजनाओं में से बहोरीबंद में ५, ढीमरखेड़ा में ६, बड़वारा में १२, विजयराघवगढ़ में ३, कटनी में ६ और रीठी में ४ नलजल योजनाएं बंद हैं। यह तो विभाग की आंकड़ा है, जबकि जमीनी हकीकत कुछ और ही है। लगभग एक सैकड़ा नलजल योजनाएं मेंटेनेंस के अभाव में दम तोड़ चुकी हैं और जिम्मेदार ध्यान नहीं दे रहे।

२३५ हैंडपंप उगल रहे हवा
जिले में एक हजार से अधिक हैंडपंप हवा उगल रहे हैं, जबकि विभाग सिर्फ २३५ ही खराब होना बता रहा है। हैरानी की बात तो यह है कि उन्हें भी नहीं सुधार पा रहा। विभागीय आंकड़ों की मानें तो कटनी में २७, रीठी में ३२, बड़वारा में २६, विजयराघवगढ़ में ३८, बहोरीबंद में ५४, ढीमरखेड़ा में ५८ हैंडपंप कई दिनों से खराब हैं। ११७ जल स्तर कम होने के कारण बंद हैं, जिनमें पाइप बढ़ाए जाने हैं इसके बाद भी विभाग काम नहीं करा पा रहा। ३४ जल स्त्रोत सूख जाने के कारण काम करना बंद कर दिए हैं।

इनका कहना है
जल स्त्रोत सूख जाने व तकनीकी खामी के चलते कुछ नलजल योजनाएं बंद हैं। शीघ्र ही उनको ठीक कराया जाएगा।
इएस बघेल, कार्यपालन यंत्री, पीएचई।

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