मसुरहा में नदी को प्रदूषणमुक्त करने बड़ी पहल, 6 करोड़ की लागत से तैयार हुआ डब्ल्यूटीपी प्लांट, शुरू हुआ ट्रायल तीन प्रमुख नालों को जोडकऱ पानी का होगा शोधन, फिर से उपयोग में लिया जाएगा पानी
कटनी. नगर निगम द्वारा शहर की जीवनदायिनी कटनी नदी को स्वच्छ और प्रदूषणमुक्त बनाने के उद्देश्य से मसुरहाघाट-मोहनघाट क्षेत्र में वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट (डब्ल्यूटीपी) का निर्माण कराया गया है। लगभग 6 करोड़ रुपए की लागत से बने इस प्लांट का निर्माण लखनऊ की ग्रीन एजर्स इनवायरो कंपनी द्वारा किया गया है। निगम अधिकारियों के अनुसार प्लांट की क्षमता 2.65 एमएलडी है, जिससे प्रतिदिन लाखों लीटर गंदे पानी का शोधन किया जा सकेगा।
यह डब्ल्यूटीपी शहर के तीन प्रमुख नालों मोहन घाट, मसुरहा घाट और गाटरघाट के बड़े नालों से आने वाले दूषित पानी को ट्रीट करेगा। राहत की बात यह है कि प्लांट का निर्माण कार्य पूर्ण हो चुका है और बीते कई दिनों से इसका सफल ट्रायल किया जा रहा है। बायोलॉजिकल सिस्टम पर आधारित इस प्लांट में विशेष बैक्टीरिया विकसित कर पानी का शोधन किया जा रहा है।
मसुरहा घाट के समीप नदी में मिलने वाले गंदे पानी को पहले एक टैंक में रोका जा रहा है, फिर पंप के माध्यम से डब्ल्यूटीपी तक पहुंचाकर शुद्ध किया जा रहा है। पूरी प्रक्रिया के बाद साफ पानी को पुन: कटनी नदी में छोड़ा जा रहा है। मोहन घाट से प्लांट तक पाइपलाइन बिछाई जा चुकी है, जबकि गाटरघाट क्षेत्र में रेलवे तकनीकी कारणों से पाइपलाइन का कार्य शीघ्र शुरू किया जाएगा। इस पहल से कटनी नदी के प्राकृतिक स्वरूप को संरक्षित करने के साथ-साथ जल गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार होने की उम्मीद है।
अभी पानी का शोधन कर नदी में छोड़ा जा रहा है। इसके अलावा शोधन के बाद पानी का उपयोग में लिया जाएगा। अग्निशमन यंत्रों में पानी भरने, शहर के डिवाइडर में हुई गार्डनिंग, शहर के गार्डन, औद्योगिक इकाइयों, रेलवे सहित अन्य कंपनियों को पानी की सप्लाई की जाएगी, ताकि पानी का सदुपयोग हो सके। इसके बाद जो पानी बचेगा वह नदी में छोड़ा जाएगा।
जैसे ही पूरी तरह से यह संयत्र काम करना शुरू कर देगा तो कटनी नदी शुद्ध होगी। क्योंकि कटायेघाट से लेकर गाटरघाट तक के हिस्से में शुद्ध पानी है। इसके बाद जहरीले नाले मिल रहे हैं, जिन्हें रोक दिया जाएगा। इसके बाद गिरजाघाट क्षेत्र में मिलने वाले नाले को रोका जाएगा।
वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट बनकर तैयार हो गया है। इसकी टेस्टिंग कराई जा रही है। मोहन घाट, मसुरहा घाट के नालों को जोड़ा जा चुका है। गाटरघाट के नाले को जोडऩे की प्रक्रिया चल रही है। पानी शोधन के बाद ही नदी में छोड़ा जाएगा, ताकि निर्मल धारा बहे। पानी के उपयोग लिए भी विभागों को पत्राचार किया गया है।